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ईरानी खतरे के बीच अमेरिका की बड़ी सैन्य रणनीति, कतर से हटाए अहम विमान; 50 हजार सैनिक हाई अलर्ट पर

अल उदेद एयरबेस से KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमानों की तैनाती बदली, इजरायल के करीब भेजे गए एयर रिफ्यूलिंग विमान

अंतरराष्ट्रीय डेस्क | पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। ईरान की ओर से संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने कतर स्थित अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे अल उदेद एयरबेस से महत्वपूर्ण KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमानों को हटाना शुरू कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन विमानों को दक्षिणी इजरायल के ओवडा एयरबेस की ओर भेजा जा रहा है। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के 50 हजार से अधिक सैनिक पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट पर तैनात हैं।

क्यों उठाया गया यह कदम?

अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंकाओं ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम नहीं, बल्कि भविष्य की सैन्य कार्रवाई को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। अमेरिका अपने महत्वपूर्ण संसाधनों को संभावित हमलों की जद से दूर रखते हुए उन्हें जरूरत पड़ने पर तुरंत अभियान में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है।

दूसरी बार हटाए गए विमान

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वर्ष दूसरी बार अमेरिका को कतर स्थित अल उदेद एयरबेस से अपने प्रमुख सैन्य विमानों को हटाना पड़ा है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि जुलाई के मध्य से कई KC-135 विमान कतर से उड़ान भर चुके हैं।

बताया जा रहा है कि 60 से अधिक अमेरिकी एयर रिफ्यूलिंग विमान इजरायल पहुंच चुके हैं। इनमें से कई विमान बेन गुरियन एयरपोर्ट पर भी देखे गए हैं। लगातार हो रही इस सैन्य गतिविधि ने पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।

क्या हैं KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान?

KC-135 स्ट्रैटोटैंकर अमेरिकी वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट विमानों में शामिल हैं। इनका मुख्य कार्य लड़ाकू विमानों और बॉम्बर्स को उड़ान के दौरान हवा में ईंधन उपलब्ध कराना होता है।

इन विमानों की मदद से फाइटर जेट लंबी दूरी तक बिना रुके मिशन पूरा कर सकते हैं। किसी भी बड़े हवाई अभियान में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही कारण है कि अमेरिका इन्हें अपनी सबसे मूल्यवान सैन्य संपत्तियों में गिनता है।

सिर्फ सुरक्षा नहीं, रणनीतिक तैयारी भी

विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों को इजरायल के करीब भेजने के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला, उन्हें संभावित ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखना और दूसरा, यदि हालात और बिगड़ते हैं तो उन्हें मोर्चे के निकट रखकर तत्काल सैन्य अभियान में इस्तेमाल किया जा सके।

इस बीच अमेरिकी सेना ने पश्चिम एशिया में अपनी तैयारियां और तेज कर दी हैं। 50 हजार से अधिक सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

अल उदेद एयरबेस का रणनीतिक महत्व

कतर का अल उदेद एयरबेस अमेरिका के लिए पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा सैन्य केंद्र माना जाता है। यहीं से अमेरिकी सेंट्रल कमांड पूरे क्षेत्र में अपने हवाई अभियानों का संचालन करता है।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड पहले भी इस एयरबेस को निशाना बनाने की चेतावनी दे चुकी है। ऐसे में अमेरिका द्वारा अपने महत्वपूर्ण विमानों को वहां से हटाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वॉशिंगटन क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं अधिक सतर्क हो गया है।

यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

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