सपा प्रमुख ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल, कहा- बल प्रयोग के बजाय बातचीत लोकतंत्र का रास्ता
नई दिल्ली/लखनऊ | राजनीतिक डेस्क | संसद के मानसून सत्र के पहले दिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने CJP प्रदर्शन को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए और सरकार को बल प्रयोग के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
पुलिस कार्रवाई पर जताई आपत्ति
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस, लाठीचार्ज और अन्य सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को आंदोलनकारियों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं तो सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए, न कि टकराव का रास्ता अपनाना चाहिए।
डॉ. राम मनोहर लोहिया का किया उल्लेख
सपा प्रमुख ने समाजवादी विचारक डॉ. राम मनोहर लोहिया का उल्लेख करते हुए कहा कि लोहिया का मानना था कि जैसे रोटी को समय-समय पर पलटना पड़ता है, वैसे ही सरकारों और मंत्रियों में भी समय-समय पर बदलाव होना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने सरकार को जनता की आवाज सुनने की सलाह दी।
सरकार की कार्यशैली पर सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवाद से बच रही है और विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान बातचीत और सहमति से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि शांतिपूर्ण आंदोलनों ने समाज और लोकतंत्र को मजबूत किया है। महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अहिंसक आंदोलन लोकतांत्रिक मूल्यों की पहचान हैं और सरकार को उसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
राजनीतिक बयान से बढ़ी सियासी गर्माहट
अखिलेश यादव ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार जनता की आवाज नहीं सुनेगी तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। वहीं, सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।