उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गाजीपुर दौरे के दौरान 692 करोड़ रुपये की लागत वाली 268 विकास एवं जनकल्याणकारी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला।
विपक्ष पर साधा निशाना
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने गाजीपुर की पहचान को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों ने विकास की बजाय प्रदेश को कानून व्यवस्था की समस्याओं और पहचान के संकट की ओर धकेला। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी के कार्यकाल की पूरी सच्चाई सामने आए तो विपक्ष के पास जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।
कानून व्यवस्था और विकास का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार की प्राथमिकता कानून व्यवस्था को मजबूत करना और विकास कार्यों को गति देना रही है। उन्होंने दावा किया कि आज उत्तर प्रदेश निवेश, आधारभूत संरचना और सुरक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। उन्होंने प्रदेश में बेहतर सड़क संपर्क, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, शिक्षा संस्थानों और अन्य विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया।
महापुरुषों के सम्मान की बात
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने महाराजा सुहेलदेव, डॉ. भीमराव अंबेडकर, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर और अन्य ऐतिहासिक एवं सामाजिक विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रनायकों को सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई संस्थानों और परियोजनाओं का नामकरण ऐसे महापुरुषों के नाम पर किया गया है।
युवाओं, किसानों और महिलाओं का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि रोजगार, आधारभूत सुविधाओं और निवेश के जरिए प्रदेश को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने जनता से विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील भी की।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। गाजीपुर की जनसभा में विकास परियोजनाओं के साथ-साथ राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में इस तरह के बयान चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।