नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह मामला वर्ष 2023 में सामने आया था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा और विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया था।
अदालत ने सबूतों के अभाव में किया बरी
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं हो सके। इसी आधार पर बृजभूषण शरण सिंह को दोषमुक्त कर दिया गया। वे जुलाई 2023 से जमानत पर थे। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के बाद वर्ष 2024 में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई थी और लगभग साढ़े तीन वर्ष चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
2023 में सामने आया था मामला
जनवरी 2023 में देश की कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। इस मामले ने पूरे देश में खेल जगत और राजनीति के बीच व्यापक बहस छेड़ दी थी।
जंतर-मंतर पर हुआ था बड़ा आंदोलन
आरोप सामने आने के बाद पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक धरना दिया था। ओलंपियन विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक समेत कई खिलाड़ियों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस आंदोलन को देशभर से समर्थन मिला और मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया।
पद छोड़ना पड़ा था
विवाद बढ़ने के बाद बृजभूषण शरण सिंह को भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा। हालांकि उन्होंने आरोपों से लगातार इनकार किया और स्वयं को निर्दोष बताया। अब अदालत के फैसले के बाद उन्हें इस मामले में कानूनी राहत मिल गई है।
राजनीतिक और खेल जगत में चर्चा तेज
बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं और कैसरगंज लोकसभा सीट से कई बार सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में उनके पुत्र करण भूषण सिंह इस सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक और खेल जगत में एक बार फिर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।