नई दिल्ली। भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाले आपत्तिजनक और अनुचित कंटेंट को लेकर सरकार अब नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है। गृह मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने सरकार से OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए एक मजबूत और प्रभावी नियामकीय व्यवस्था तैयार करने की सिफारिश की है।
समिति का जोर खासतौर पर नाबालिगों को अश्लील और उम्र के लिहाज से अनुचित सामग्री से बचाने पर है। इसके लिए तकनीक आधारित आयु सत्यापन, प्रभावी पैरेंटल कंट्रोल और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर जुर्माने जैसे प्रावधान लागू करने का सुझाव दिया गया है।
OTT के लिए व्यापक कानूनी ढांचा बनाने की तैयारी
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय OTT प्लेटफॉर्म्स पर अनुचित कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी नई व्यवस्था में नागरिकों के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का ध्यान रखा जाना जरूरी होगा। यानी सरकार का उद्देश्य सिर्फ कंटेंट पर रोक लगाना नहीं, बल्कि ऐसा संतुलित सिस्टम तैयार करना है, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बच्चों की सुरक्षा दोनों का ध्यान रखा जा सके।
संसदीय समिति ने दिए ये सुझाव
संसदीय समिति ने अपनी 259वीं रिपोर्ट में OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें मजबूत तकनीक आधारित एज वेरिफिकेशन, प्रभावी पैरेंटल कंट्रोल और उल्लंघन करने पर सख्त आर्थिक दंड प्रमुख हैं। समिति का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में सेल्फ-रेगुलेशन पर काफी निर्भरता है। ऐसे में शिकायतों के निपटारे और आपत्तिजनक सामग्री की समीक्षा के लिए स्वतंत्र व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।
पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल का सुझाव
समिति ने पहले भी OTT कंटेंट के लिए एक स्वतंत्र ‘पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल’ बनाने की सिफारिश की थी। इस पैनल में बाल विकास, शिक्षा, कानून, सामाजिक विज्ञान और नागरिक समाज से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। यह पैनल यूजर्स की शिकायतों के आधार पर विवादित या आपत्तिजनक कंटेंट की समीक्षा कर सकेगा और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है।
बच्चों तक कैसे पहुंच रहा है आपत्तिजनक कंटेंट?
समिति के मुताबिक OTT प्लेटफॉर्म्स पर उम्र की रेटिंग और पैरेंटल कंट्रोल जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन कमजोर आयु सत्यापन व्यवस्था के कारण नाबालिग अभी भी उम्र के लिहाज से अनुचित सामग्री तक पहुंच सकते हैं। इसी वजह से समिति ने तकनीक आधारित उम्र सत्यापन प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया है। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि बच्चों को उनके लिए अनुपयुक्त कंटेंट तक आसानी से पहुंच न मिले।
नियम तोड़ने पर हो सकता है जुर्माना
संसदीय समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि नए नियमों का उल्लंघन करने वाले OTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जुर्माने और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए। समिति के अनुसार, नए नियम बनाते समय देश की सांस्कृतिक संवेदनशीलता के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
OTT बन चुके हैं मनोरंजन का बड़ा माध्यम
समिति ने अपनी पिछली रिपोर्ट में भी कहा था कि OTT प्लेटफॉर्म्स मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं और उनकी पहुंच पारंपरिक सिनेमा से भी आगे बढ़ गई है। OTT की बढ़ती लोकप्रियता के साथ नाबालिग दर्शकों की संख्या भी बड़ी है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते दायरे के बीच बच्चों की सुरक्षा, कंटेंट की जिम्मेदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।