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चाबहार से बंदर अब्बास तक धमाके, ईरान पर अमेरिकी हमलों से बढ़ा तनाव; होर्मुज में फिर टकराव!

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने की खबर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल शिप और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर ईरान की ओर से किए गए हालिया हमलों के जवाब में की गई।

चाबहार और बंदर अब्बास समेत कई इलाकों में धमाकों की खबर

ईरानी स्थानीय मीडिया और IRGC से जुड़े चैनलों के अनुसार, अमेरिकी हमलों के बाद दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी ईरान के कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्टों में चाबहार, बंदर अब्बास, कोणारक, किश्म, जास्क, सिरिक और मीनाब जैसे तटीय क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के IRGC से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, हमलों से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर स्वतंत्र रूप से विस्तृत पुष्टि सामने आना अभी बाकी है।

ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, मिसाइल हमले से बड़ा नुकसान नहीं हुआ। वहीं ईरानी पक्ष ने दावा किया कि उसने अमेरिकी सैन्य ढांचे और लड़ाकू विमानों से जुड़े क्षेत्रों को निशाना बनाया।

इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान की कार्रवाई का जवाब देने की चेतावनी दे चुके थे।

ट्रंप ने कहा- बातचीत की संभावना अभी खत्म नहीं

ट्रंप ने एक ओर ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही, वहीं दूसरी ओर बातचीत की संभावना भी पूरी तरह समाप्त नहीं होने का संकेत दिया। उन्होंने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर भरोसे की कमी जताई और प्रतिबंधों के प्रभाव का भी उल्लेख किया।

होर्मुज संकट से बढ़ सकती है तेल सप्लाई की चिंता

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और ऊर्जा मार्गों में शामिल है। इस क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर हमलों और सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात को रोकने की चेतावनी भी दी है। ऐसे में यदि होर्मुज में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव बातचीत की ओर लौटता है या फिर मिडिल ईस्ट में संघर्ष का दायरा और व्यापक होता है।

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