कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान (CPP) ने खुद को युवाओं और आम नागरिकों की आवाज बताया, भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ अभियान चलाने का दावा
इस्लामाबाद। भारत में चर्चा में रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बाद अब पाकिस्तान में भी कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान (CPP) नाम का एक नया राजनीतिक समूह सुर्खियों में है। यह समूह फिलहाल सोशल मीडिया के जरिए अपनी पहचान बना रहा है और खुद को युवाओं तथा आम नागरिकों की आवाज बताता है। इंस्टाग्राम पर इसके 1 लाख 12 हजार से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं, जिससे इसकी ऑनलाइन लोकप्रियता तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है।
कौन चला रहा है यह अभियान?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस पहल की शुरुआत सलमान तरार ने की है, जो न्यूयॉर्क में पढ़ाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्रोफाइल के अनुसार, CPP का इंस्टाग्राम अकाउंट मई 2026 में बनाया गया था। अकाउंट को कनाडा से संचालित बताया गया है और हाल ही में इसे वेरिफाइड भी किया गया है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह समूह पाकिस्तान के चुनाव आयोग में एक पंजीकृत राजनीतिक दल है या फिलहाल केवल सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक अभियान के रूप में काम कर रहा है।
किन मुद्दों को बना रही है आधार?
कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान का दावा है कि उसका उद्देश्य देश में पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। पार्टी ने अपने सार्वजनिक एजेंडे में कई प्रमुख मुद्दों को शामिल किया है, जिनमें—
- भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई
- परिवारवाद और विशेषाधिकार आधारित राजनीति का विरोध
- युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
- शिक्षा व्यवस्था में सुधार
- ऊर्जा संकट का समाधान
- पानी की कमी से निपटना
- आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता
शामिल हैं।
युवाओं को जोड़ने पर फोकस
CPP सोशल मीडिया के माध्यम से खासतौर पर युवाओं तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पार्टी का कहना है कि वह आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और नई राजनीतिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही है।
सोशल मीडिया पर बढ़ रही चर्चा
इंस्टाग्राम पर तेजी से बढ़ते फॉलोअर्स के कारण यह समूह पाकिस्तान के सोशल मीडिया स्पेस में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय ऐसे नए समूह पारंपरिक राजनीति के समानांतर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, यह देखना बाकी होगा कि यह पहल भविष्य में औपचारिक राजनीतिक दल का रूप लेती है या सोशल मीडिया अभियान तक ही सीमित रहती है।