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ट्रंप के ‘ईगो टैरिफ़’ विवाद पर गरमाई बहस: रघुराम राजन के बयान से क्यों उबल रहा है मुद्दा?

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक फैसलों के बीच ‘ईगो’ का मसला कितना बड़ा रोल निभा सकता है—इस पर बहस तब और तेज हो गई जब भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर और वैश्विक अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ़ को “व्यक्तित्वों का टकराव” बताया।

अपने सार्वजानिक किये बयान में राजन ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% तक के टैरिफ़ का कारण रूस से तेल आयात नहीं, बल्कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान संघर्ष-विराम का श्रेय ट्रंप को न देना था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आर्थिक विश्लेषकों तक, सभी जगह नई बहस छिड़ गई है।

क्या कहा रघुराम राजन ने?

ज़्यूरिख़ में एक इंटरैक्शन के दौरान राजन ने कहा कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ़ का आधार आर्थिक कारणों की तुलना में अधिक राजनीतिक था।
उनके अनुसार:

“रूस से भारत का तेल खरीदना केंद्रीय मुद्दा नहीं था। असल मुद्दा व्यक्तित्वों का टकराव है।”

राजन ने आरोप लगाया कि ट्रंप भारत-पाकिस्तान तनाव कम कराने का श्रेय लेना चाहते थे, लेकिन भारत सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। यही बात व्हाइट हाउस को नागवार गुज़री और टैरिफ़ बढ़ा दिए गए।

टैरिफ़ विवाद की पृष्ठभूमि

  • 30 जुलाई 2025: ट्रंप ने भारत से आयातित सामान पर 25% टैरिफ़ लगाया
  • आरोप: भारत रूस से रियायती तेल खरीद रहा था
  • इसके बाद 25% अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ़, 27 अगस्त से लागू
  • कुछ उत्पाद—दवाइयाँ, स्मार्टफोन—इससे बाहर
  • सबसे ज़्यादा नुकसान: कपड़ा उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

वहीं पाकिस्तान पर सिर्फ 19% टैरिफ़ लगाया गया, जिससे अमेरिका को पाकिस्तान के निर्यात में 15% की बढ़त हुई।

क्या सचमुच यह ‘ईगो क्लैश’ था? विश्लेषकों की राय

राजन के बयान के बाद विशेषज्ञों ने कुछ मुख्य बिंदुओं पर रोशनी डाली:

✔ 1. ट्रंप के निर्णयों में अक्सर व्यक्तिगत पसंद-नापसंद का असर रहा है

कई विश्लेषकों का दावा है कि ट्रंप की नीतियाँ अक्सर व्यक्तिगत नाराज़गी या रणनीतिक दबाव से जुड़ी रही हैं।

✔ 2. भारत का ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप को श्रेय न देना मसले की जड़?

भारत ने दावा किया कि संघर्ष-विराम उनकी डिप्लोमैसी से संभव हुआ, न कि अमेरिका की मध्यस्थता से।

✔ 3. पाकिस्तान के ‘नैरेटिव सपोर्ट’ करने के फायदे

पाकिस्तान ने ट्रंप के बयान का समर्थन किया और उसे कम टैरिफ़ के रूप में लाभ मिला।

✔ 4. टैरिफ़ सिर्फ आर्थिक नहीं, भू-रणनीतिक दबाव का साधन भी हैं

अमेरिका ने 30 जुलाई को कुल 69 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगाए—भारत अकेला निशाना नहीं था।

राजन का संकेत: “यह आर्थिक नहीं, राजनीतिक मुद्दा है”

राजन ने कहा कि भारत- अमेरिका टैरिफ़ विवाद का मूल कारण नेरेटिव और ईगो है।
उनके अनुसार:

“असली सच शायद दोनों बातों के बीच है… लेकिन नतीजा यह हुआ कि भारत पर 50% और पाकिस्तान पर 19% टैरिफ़ लगा।”

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