Moradabad

SIR शुरू होते ही गांव से गायब हुए संदिग्ध लोग, रानी नागल में खुफिया विभाग अलर्ट; फर्जी वोटर मामले की जांच तेज

मुरादाबाद। एसआइआर (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया शुरू होते ही भोजपुर क्षेत्र के गांव रानी नागल से दर्जनों संदिग्ध लोग गांव छोड़कर फरार हो गए। मामला सामने आते ही पुलिस और खुफिया विभाग (LIU) अलर्ट हो गया है। प्रारंभिक जांच में खुफिया एजेंसियां इन लोगों को रोहिंग्या संदिग्ध मान रही हैं। गुरुवार को खुफिया विभाग की टीम गांव पहुंची और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई।

2018 में आए, 2020 में बन गए वोटर

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में करीब 92 घूमंतू लोग गांव रानी नागल में आकर कच्चा निर्माण कर रहने लगे थे। आरोप है कि इन्होंने सांठगांठ कर पहले आधार कार्ड बनवाए, फिर वर्ष 2020 की मतदाता सूची में अपने नाम दर्ज करा लिए। इसके बाद इनके राशन कार्ड भी बन गए और एक व्यक्ति को तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी मिल गया।

SIR शुरू होते ही गांव छोड़कर भागे लोग

जैसे ही उत्तर प्रदेश में एसआइआर की प्रक्रिया शुरू हुई, वैसे ही ये संदिग्ध लोग गांव से गायब हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हें पकड़े जाने का डर था। फिलहाल अधिकांश लोग गांव में मौजूद नहीं हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है।

शिकायत पर प्रशासन हरकत में

गांव के पूर्व प्रधान सईदुल ने जिलाधिकारी अनुज सिंह और एसएसपी सतपाल अंतिल से लिखित शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब 92 अवैध वोट बनवाए गए हैं और एक बार फिर इन्हें दोबारा वोटर बनाने का प्रयास हो रहा है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम सदर डॉ. राम मोहन मीणा गांव पहुंचे और जांच की। जांच में सामने आया कि 92 में से केवल 10 गणना पत्र जमा किए गए, वह भी महिलाओं के, जिनकी मैपिंग सहारनपुर जनपद से पाई गई।

सहारनपुर की महिलाओं से शादी का दावा

जांच में यह भी सामने आया है कि इन संदिग्ध लोगों में से कई ने सहारनपुर की महिलाओं से शादी की है। इसी कारण एसआइआर के दौरान महिलाओं की मैपिंग सहारनपुर से की गई। पुलिस और खुफिया विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि ये लोग मूल रूप से कहां के निवासी हैं।

दो हजार बंगालियों के बीच संदिग्धों का इनपुट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही मुरादाबाद में घुसपैठियों को लेकर संकेत दे चुके हैं। खुफिया विभाग के पास इनपुट है कि मुरादाबाद में करीब दो हजार बंगाल के लोगों के बीच कुछ संदिग्ध छिपे हो सकते हैं। रानी नागल का मामला सामने आने के बाद शहर के अन्य इलाकों में भी फर्जी दस्तावेजों की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों में डर और आक्रोश

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ये लोग दबंगई दिखाते हैं, रात के समय बाहर चले जाते हैं और इनके कामकाज का कोई स्पष्ट पता नहीं है। गांव वालों ने प्रशासन से सख्त जांच और कार्रवाई की मांग की है।
एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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