सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अमेरिका ने बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिये की मौत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने Operation Hawkeye Strike के तहत सीरिया में आतंक के अड्डों पर व्यापक हवाई और जमीनी कार्रवाई की।
🇺🇸 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बदले की कार्रवाई
लगभग एक सप्ताह पहले सीरिया के रेगिस्तानी इलाके में हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया की मौत हो गई थी। इस हमले के लिए अमेरिका ने सीधे तौर पर इस्लामिक स्टेट को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने सख्त जवाब देने का ऐलान किया था, जिसके तहत यह सैन्य कार्रवाई की गई।
ISIS के 70 ठिकानों पर हमला
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में सीरिया के अलग-अलग इलाकों में ISIS के 70 ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें आतंकी संगठन के
- हथियार भंडार
- ऑपरेशन बेस
- लॉजिस्टिक और कमांड सेंटर
शामिल थे। अमेरिका ने दावा किया है कि इस हमले में बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया गया है और संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है।
अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल
अमेरिकी सेना ने इस हमले में अत्याधुनिक सैन्य तकनीक का प्रयोग किया। कार्रवाई में
- F-15 Eagle लड़ाकू विमान
- A-10 Thunderbolt ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट
- AH-64 Apache हेलिकॉप्टर
- F-16 फाइटर जेट (जॉर्डन से उड़ान)
- HIMARS रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम
का इस्तेमाल किया गया। जमीन और हवा से एक साथ हमला कर ISIS को कमजोर करने का दावा किया गया है।
क्या बोले अमेरिका के रक्षा मंत्री
अमेरिका के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह किसी युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि अपने नागरिकों की हत्या का बदला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका दुनिया में कहीं भी अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाने वालों को ढूंढकर खत्म करेगा।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह युद्ध की शुरुआत नहीं बल्कि बदले की घोषणा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी आतंकवादी अमेरिकियों को निशाना बनाएगा, उसे पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कभी पीछे नहीं हटेगा।
सीरिया सरकार की प्रतिक्रिया
अमेरिकी हमलों के बाद सीरिया के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की जरूरत को दर्शाती है। सीरिया ने दावा किया कि वह अपने देश में ISIS को किसी भी तरह का सुरक्षित ठिकाना नहीं देगा और आतंकवाद के खिलाफ अभियान जारी रखेगा।
पलमायरा हमला बना कार्रवाई की वजह
पिछले शनिवार को पलमायरा के पास हुई फायरिंग में अमेरिकी नेशनल गार्ड के सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-तोवार, सार्जेंट विलियम नाथनियल हॉवर्ड और अमेरिकी नागरिक दुभाषिया अयाद मंसूर सकत की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि हमलावर के ISIS से संबंध थे और उसे मौके पर ही मार गिराया गया था।