Bangladesh Protests Live Updates: बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदू समुदाय के व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया है, जिसके बाद भारत सहित कई जगहों पर आक्रोश देखने को मिल रहा है। ओडिशा के पुरी स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर के बाहर हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने विरोध प्रदर्शन किया और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
29 वर्षीय अमृत मंडल की हत्या, इलाके में तनाव
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट की हत्या बुधवार रात करीब 11 बजे बांग्लादेश के राजबारी जिले के पांग्शा उप-जिले में हुई। यह इलाका राजधानी ढाका से लगभग साढ़े तीन घंटे की दूरी पर स्थित है। बताया जा रहा है कि अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या की गई।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ ही दिन पहले दीपू चंद्र दास की हत्या कर शव जलाने का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था। लगातार हो रही घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंतरिम सरकार का दावा: सांप्रदायिक हिंसा नहीं
बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस हत्या को सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ने से इनकार किया है। सरकार ने बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में इस घटना को लेकर “भ्रामक जानकारी” फैलाई जा रही है।
सरकारी बयान में कहा गया,
“पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार यह घटना सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी नहीं है। यह जबरन वसूली और आपराधिक गतिविधियों से उत्पन्न एक हिंसक स्थिति का परिणाम है।”
सरकार के मुताबिक, अमृत मंडल एक कुख्यात अपराधी था और इलाके में जबरन वसूली के उद्देश्य से पहुंचा था। इसी दौरान स्थानीय निवासियों के साथ झड़प में उसकी मौत हो गई।
भारत में भी विरोध, पुरी में गूंजा आक्रोश
इस घटना के विरोध में पुरी जगन्नाथ मंदिर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार सच्चाई छिपाने का प्रयास कर रही है।
बढ़ती घटनाएं, सवाल बरकरार
हालांकि सरकार के दावों के बावजूद, बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की श्रृंखला ने हालात को चिंताजनक बना दिया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और क्या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाते हैं।