लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं, जबकि 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम बरकरार हैं। इन आंकड़ों के सामने आते ही प्रदेश की राजनीति में घमासान मच गया है। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी समाजवादी पार्टी आमने-सामने हैं।
इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि SIR से भाजपा खुद परेशान है और इसी डर से पार्टी “गुपचुप बैठकें” कर रही है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबा बयान जारी करते हुए इसे वोट काटने की साजिश करार दिया और खासतौर पर पीडीए समाज (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को सतर्क रहने की अपील की।
“वोटर लिस्ट नागरिकता की पहचान है”
अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि वोटर लिस्ट में नाम होना सिर्फ मतदान का अधिकार नहीं, बल्कि नागरिक होने की पहचान है। उन्होंने कहा कि अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया तो भविष्य में सरकार इसी आधार पर राशन कार्ड, सरकारी योजनाएं, जाति प्रमाणपत्र, आरक्षण, बैंक खाता, पैन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जमीन-जायदाद जैसे अधिकारों पर भी खतरा पैदा कर सकती है। उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।
“हर बूथ पर वोट बचाने की लड़ाई”
सपा प्रमुख ने कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद करोड़ों वोट काटे गए हैं। अब जरूरी है कि हर बूथ पर गहन जांच हो और “एक भी वोट न कटने पाए, एक भी वोट न घटने पाए” के संकल्प के साथ काम किया जाए। उन्होंने पीडीए समाज से अपील की कि वह सजग रहे, अपना वोट जरूर बनवाए और अपने अधिकारों की रक्षा करे।
भाजपा पर फर्जी वोट का आरोप
अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा के लोग अब वोट बढ़ाने का दबाव बनाएंगे, क्योंकि उनके फर्जी वोट कट गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले फर्जी वोट बनवाए गए और वही वोट डाले गए, जिनमें सबसे ज्यादा भाजपा के बूथों पर पाए गए। उन्होंने मांग की कि नकली वोट बनाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज हो।
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा प्रवक्ता अशोक पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग किसी पार्टी का संगठन नहीं है। जितना अधिकार भाजपा का है, उतना ही विपक्ष का भी है। उन्होंने कहा कि अगर सपा को आपत्ति है तो वह अपने बीएलए हर बूथ पर तैनात कर सकती है, क्योंकि समय सीमा बढ़ाई गई है।
सपा का जवाब: “SIR के जरिए NRC जैसा माहौल”
वहीं सपा प्रवक्ता अमीक जमीईन ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए NRC जैसा माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को प्रक्रिया की जानकारी नहीं है और जिनका वोट कट गया, उन्हें दोबारा सूची में कैसे जोड़ा जाएगा—यह एक बड़ी समस्या है। सपा ने दावा किया कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी, इसी डर से वोट काटने की साजिश रची जा रही है।
कुल मिलाकर, SIR को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में टकराव तेज हो गया है। आने वाले दिनों में वोटर लिस्ट, SIR और लोकतंत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रदेश की सियासत के केंद्र में बने रहेंगे।