नई दिल्ली।
ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद अब नाटो (NATO) देशों ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। डेनमार्क के अनुरोध पर अब तक 6 नाटो देशों ने सीमित संख्या में अपने सैनिक और सैन्य कर्मी वहां तैनात करने का फैसला किया है।
क्यों रणनीतिक रूप से अहम है ग्रीनलैंड?
ग्रीनलैंड, भले ही डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र हो, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे आर्कटिक क्षेत्र में बेहद अहम बनाती है। रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच ग्रीनलैंड वैश्विक सुरक्षा संतुलन का केंद्र बन गया है।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताते हुए उस पर नियंत्रण की बात कही थी। ट्रंप का दावा है कि रूस और चीन भविष्य में ग्रीनलैंड का इस्तेमाल अपने रणनीतिक हितों के लिए कर सकते हैं।
इन्हीं बयानों के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपने सहयोगी नाटो देशों से सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की अपील की।
किन-किन देशों ने भेजे सैनिक?
डेनमार्क की अपील पर जिन 6 नाटो देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य तैनाती की है, उनमें शामिल हैं:
- 🇸🇪 स्वीडन
- 🇳🇴 नॉर्वे
- 🇩🇪 जर्मनी
- 🇫🇷 फ्रांस
- 🇳🇱 नीदरलैंड्स
- 🇨🇦 कनाडा
यह तैनाती डेनमार्क के सैन्य अभ्यास ‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ के तहत की जा रही है।
🇸🇪🇳🇴 स्वीडन और नॉर्वे ने की शुरुआत
स्वीडन सबसे पहला देश रहा जिसने ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने की घोषणा की। स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने कहा कि यह कदम डेनमार्क के अनुरोध पर उठाया गया है।
इसके बाद नॉर्वे के रक्षा मंत्री टोरे सैंडविक ने भी दो सैन्य कर्मियों को ग्रीनलैंड भेजने की पुष्टि की।
🇩🇪🇫🇷 जर्मनी और फ्रांस भी शामिल
जर्मनी ने एक टोही मिशन के तहत 13 सैनिक ग्रीनलैंड भेजे हैं, जिनका उद्देश्य समुद्री निगरानी और सुरक्षा आकलन करना है। वहीं फ्रांस ने भी संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए अपने सैन्य कर्मी तैनात किए हैं।
नाटो की तैनाती का असली मकसद क्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सैन्य गतिविधि के पीछे कई संदेश छिपे हैं:
- नाटो यह दिखाना चाहता है कि आर्कटिक सुरक्षा को लेकर वह एकजुट है
- रूस और चीन के संभावित प्रभाव को रोकने का संकेत
- ट्रंप को यह संदेश कि ग्रीनलैंड पर कब्जे की कोशिश नाटो सहयोगियों से टकराव बढ़ा सकती है
हालांकि, सभी देशों ने बहुत सीमित संख्या में सैनिक भेजे हैं, जिससे यह साफ है कि यह कदम आक्रामक नहीं बल्कि प्रतीकात्मक एकजुटता को दर्शाता है।
नाटो में मतभेद बरकरार
ट्रंप लगातार नाटो पर अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लेने का दबाव बनाते रहे हैं। लेकिन डेनमार्क समेत कई नाटो देशों का कहना है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और नाटो के नियमों के तहत सदस्य देश एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते।