नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी चिंता भी गहराती जा रही है—भारत का चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा (Trade Deficit)। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत एक्सपोर्ट के मुकाबले चीन से कहीं ज्यादा इम्पोर्ट कर रहा है, जिसके चलते ट्रेड डेफिसिट रिकॉर्ड 116.12 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहा, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
चीन के साथ क्यों बढ़ा भारत का व्यापार?
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के बाद भारत ने अपने व्यापारिक विकल्पों को व्यापक किया। इसी क्रम में चीन के साथ कारोबार में तेजी आई। चीनी कस्टम्स के सालाना ट्रेड डेटा के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच चीन को भारत के एक्सपोर्ट में 5.5 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है।
हालांकि, एक्सपोर्ट बढ़ने के बावजूद इम्पोर्ट की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज रही, जिससे व्यापार घाटा और गहरा हो गया।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा ट्रेड डेफिसिट
आंकड़ों के मुताबिक:
- 2025 में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 155.62 बिलियन डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया
- भारत का चीन को एक्सपोर्ट: 19.75 बिलियन डॉलर (9.7% की बढ़ोतरी)
- चीन का भारत को एक्सपोर्ट: 135.87 बिलियन डॉलर (12.8% की उछाल)
- कुल ट्रेड डेफिसिट: 116.12 बिलियन डॉलर
यह 2023 के बाद दूसरी बार है जब भारत-चीन ट्रेड डेफिसिट 100 बिलियन डॉलर के पार गया है। 2024 में यह आंकड़ा 99.21 बिलियन डॉलर था।
भारत ज्यादा क्या मंगा रहा है चीन से?
भारत चीन से बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल कंपोनेंट्स, मशीनरी, केमिकल्स, फार्मा के कच्चे माल और सोलर इक्विपमेंट का आयात करता है। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इन सेक्टरों में अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है, जिससे चीन पर निर्भरता बनी हुई है।
क्या होता है व्यापार घाटा और क्यों खतरनाक है?
जब कोई देश निर्यात से ज्यादा आयात करता है, तो उसे व्यापार घाटा कहा जाता है।
क्रिसिल और अन्य रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक, लगातार बढ़ता ट्रेड डेफिसिट:
- देश की करेंसी पर दबाव डालता है
- विदेशी मुद्रा भंडार घटाता है
- नौकरी सृजन की रफ्तार को धीमा करता है
- घरेलू उद्योगों को कमजोर करता है
अगर आयात लगातार बढ़ता रहा और निर्यात उस अनुपात में नहीं बढ़ा, तो यह इकोनॉमी को खोखला कर सकता है।
आगे क्या है चुनौती?
भारत सरकार ‘मेक इन इंडिया’, ‘पीएलआई स्कीम’ और सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन जैसे कदम उठा रही है, ताकि चीन पर निर्भरता कम की जा सके। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपोर्ट बेस बढ़ाए बिना और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती दिए बिना ट्रेड डेफिसिट पर काबू पाना आसान नहीं होगा।
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी चिंता भी गहराती जा रही है—भारत का चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा (Trade Deficit)। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत एक्सपोर्ट के मुकाबले चीन से कहीं ज्यादा इम्पोर्ट कर रहा है, जिसके चलते ट्रेड डेफिसिट रिकॉर्ड 116.12 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहा, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
चीन के साथ क्यों बढ़ा भारत का व्यापार?
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के बाद भारत ने अपने व्यापारिक विकल्पों को व्यापक किया। इसी क्रम में चीन के साथ कारोबार में तेजी आई। चीनी कस्टम्स के सालाना ट्रेड डेटा के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच चीन को भारत के एक्सपोर्ट में 5.5 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है।
हालांकि, एक्सपोर्ट बढ़ने के बावजूद इम्पोर्ट की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज रही, जिससे व्यापार घाटा और गहरा हो गया।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा ट्रेड डेफिसिट
आंकड़ों के मुताबिक:
- 2025 में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 155.62 बिलियन डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया
- भारत का चीन को एक्सपोर्ट: 19.75 बिलियन डॉलर (9.7% की बढ़ोतरी)
- चीन का भारत को एक्सपोर्ट: 135.87 बिलियन डॉलर (12.8% की उछाल)
- कुल ट्रेड डेफिसिट: 116.12 बिलियन डॉलर
यह 2023 के बाद दूसरी बार है जब भारत-चीन ट्रेड डेफिसिट 100 बिलियन डॉलर के पार गया है। 2024 में यह आंकड़ा 99.21 बिलियन डॉलर था।
भारत ज्यादा क्या मंगा रहा है चीन से?
भारत चीन से बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल कंपोनेंट्स, मशीनरी, केमिकल्स, फार्मा के कच्चे माल और सोलर इक्विपमेंट का आयात करता है। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इन सेक्टरों में अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है, जिससे चीन पर निर्भरता बनी हुई है।
क्या होता है व्यापार घाटा और क्यों खतरनाक है?
जब कोई देश निर्यात से ज्यादा आयात करता है, तो उसे व्यापार घाटा कहा जाता है।
क्रिसिल और अन्य रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक, लगातार बढ़ता ट्रेड डेफिसिट:
- देश की करेंसी पर दबाव डालता है
- विदेशी मुद्रा भंडार घटाता है
- नौकरी सृजन की रफ्तार को धीमा करता है
- घरेलू उद्योगों को कमजोर करता है
अगर आयात लगातार बढ़ता रहा और निर्यात उस अनुपात में नहीं बढ़ा, तो यह इकोनॉमी को खोखला कर सकता है।
आगे क्या है चुनौती?
भारत सरकार ‘मेक इन इंडिया’, ‘पीएलआई स्कीम’ और सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन जैसे कदम उठा रही है, ताकि चीन पर निर्भरता कम की जा सके। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपोर्ट बेस बढ़ाए बिना और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती दिए बिना ट्रेड डेफिसिट पर काबू पाना आसान नहीं होगा।