नई दिल्ली/वॉशिंगटन/मॉस्को: दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था को झटका देने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों पर नियंत्रण रखने वाली न्यू START संधि अब खत्म हो गई है। यह वही समझौता था जिसने दोनों देशों के परमाणु हथियारों की संख्या पर सीमा तय कर रखी थी।
संधि के खत्म होते ही वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है कि अब अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है। रूस के पूर्व राष्ट्रपति और सुरक्षा परिषद से जुड़े दिमित्री मेदवेदेव ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह कदम दुनिया को परमाणु युद्ध के और करीब ला सकता है।
2010 में हुआ था समझौता, 1550 वॉरहेड की सीमा थी
न्यू START संधि पर साल 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1550 तैनात परमाणु वारहेड रखने की अनुमति थी।
यह समझौता शीत युद्ध के बाद परमाणु हथियार नियंत्रण का सबसे अहम समझौता माना जाता रहा है।
अमेरिका का आरोप: रूस ने निरीक्षण नहीं करने दिया
अमेरिका लंबे समय से रूस पर संधि की शर्तें तोड़ने का आरोप लगाता रहा है। अमेरिकी पक्ष का कहना था कि रूस ने परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति नहीं दी, जिससे संधि के नियमों पर सवाल खड़े हुए।
दूसरी ओर, रूस की तरफ से यह संकेत भी दिए जाते रहे कि वह संधि को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
ट्रंप बोले- “चिंता नहीं, आगे बेहतर डील हो सकती है”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संधि खत्म होने को लेकर ज्यादा चिंता जाहिर नहीं की। ट्रंप का कहना रहा कि अगर यह संधि खत्म होती है तो भविष्य में नई और बेहतर डील की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संधि खत्म होने के बाद अमेरिका को परमाणु हथियारों के विस्तार की ज्यादा छूट मिल सकती है।
दुनिया पर असर: हथियारों की दौड़ और बढ़ता तनाव
विशेषज्ञों के मुताबिक न्यू START के खत्म होने से अमेरिका, रूस और चीन के बीच परमाणु प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संतुलन कमजोर होने का खतरा है और कई देश अपनी रक्षा नीति में बदलाव कर सकते हैं।