कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं और अब 140 डॉलर तक जाने की आशंका जताई जा रही है। Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है, खासकर भारत जैसे आयातक देशों में।
ट्रंप बनाम ईरान: जुबानी जंग तेज
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया था कि पाबंदियों और नाकेबंदी के चलते ईरान के तेल कुएं ठप हो सकते हैं।
इसके जवाब में ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी नीतियां ही तेल को महंगा बना रही हैं। ईरान ने यहां तक कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे अपने तेल कुओं का लाइव प्रसारण भी दिखा सकते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र
तेल संकट की सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz में अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड को माना जा रहा है।
यह रास्ता दुनिया की बड़ी तेल सप्लाई का केंद्र है, और यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे कीमतों को प्रभावित करता है।
140 डॉलर तक क्यों जा सकता है तेल?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो सप्लाई बाधित हो सकती है।
ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
👉 इससे महंगाई बढ़ेगी
👉 ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा
👉 आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा
आम जनता पर क्या होगा असर?
अगर तेल 140 डॉलर तक पहुंचता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
इसका असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ेगा।
क्या दुनिया ऊर्जा संकट की ओर?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि दुनिया एक संभावित ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है।
अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।