मॉस्को/नई दिल्ली: 21वीं सदी में लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और डेटा कंट्रोल की भी है। अमेरिका और चीन के बाद अब रूस भी डिजिटल वर्चस्व की इस जंग में तेज़ी से आगे बढ़ता दिख रहा है। ताजा घटनाक्रम में WhatsApp ने आरोप लगाया है कि रूस ने देश में उसकी सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश की है, ताकि यूजर्स को सरकार समर्थित घरेलू ऐप की ओर मोड़ा जा सके।
Meta Platforms के स्वामित्व वाले WhatsApp के प्रवक्ता के अनुसार, रूस का यह कदम इंटरनेट स्पेस पर नियंत्रण बढ़ाने और विदेशी टेक कंपनियों की भूमिका सीमित करने की रणनीति का हिस्सा है। इसे कई लोग रूस का “चीन वाला मॉडल” अपनाने की दिशा में बड़ा संकेत मान रहे हैं।
यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा टेक टकराव
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद मॉस्को और पश्चिमी टेक कंपनियों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। रूस पहले ही कई विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण और प्रतिबंध की दिशा में कदम उठा चुका है।
रूस में ‘MAX’ ऐप को बढ़ावा
रूसी अधिकारी घरेलू स्तर पर विकसित एक ऐप ‘MAX’ को प्रमोट कर रहे हैं, जिसे सरकार समर्थित बताया जा रहा है।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह ऐप यूजर्स की निगरानी और डेटा ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं सरकारी मीडिया ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
WhatsApp ने दावा किया कि रूस यूजर्स को एक सरकारी-स्वामित्व वाले सर्विलांस ऐप की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा है। कंपनी ने कहा,
“हम उपयोगकर्ताओं को जुड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे।”
क्रेमलिन का साफ संदेश: कानून मानोगे तो वापसी संभव
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने TASS को दिए बयान में कहा कि WhatsApp की वापसी रूसी कानूनों के पालन पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा,
“अगर Meta कानून का पालन करती है और रूसी अधिकारियों के साथ संवाद करती है, तो समझौते की संभावना बन सकती है। लेकिन अगर कंपनी अडिग रही, तो कोई संभावना नहीं।”
WhatsApp को ऑनलाइन डायरेक्टरी से हटाया गया
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के संचार नियामक रोसकोमनादज़ोर ने WhatsApp को अपनी ऑनलाइन डायरेक्टरी से हटा दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार रूस में WhatsApp के करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं, जिससे यह देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है।
Apple और कॉल फीचर्स पर भी कार्रवाई
रूस ने पिछले साल WhatsApp और Telegram जैसी विदेशी मैसेजिंग सेवाओं पर कुछ कॉल सुविधाओं को सीमित करना शुरू कर दिया था।
रूसी अधिकारियों का आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म:
- धोखाधड़ी
- आतंकवाद
- और आपराधिक मामलों
में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने से इनकार करते हैं।
इसके अलावा, दिसंबर में Apple के वीडियो कॉलिंग ऐप FaceTime को भी ब्लॉक किया गया था।
डिजिटल संप्रभुता की जंग
विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद केवल ऐप बैन तक सीमित नहीं है। यह मामला:
- डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty)
- डेटा कंट्रोल
- विदेशी टेक कंपनियों का प्रभाव
- नागरिकों की ऑनलाइन स्वतंत्रता
जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ा है।
अगर रूस में WhatsApp पर पूर्ण प्रतिबंध लगता है, तो लाखों लोगों की दैनिक संचार व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। संकेत साफ हैं कि आने वाले समय में रूस और पश्चिमी टेक कंपनियों के बीच टकराव और गहरा हो सकता है।