वृंदावन: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया नाम तेजी से चर्चा में है। UGC एक्ट के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और निलंबित PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अब खुलकर राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया है।
शुक्रवार को वृंदावन पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री का ब्राह्मण सेवा संघ द्वारा स्वागत किया गया। इसी दौरान उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा कि वे सनातन या सवर्ण समाज के नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे और आने वाले समय में चुनाव भी लड़ेंगे।
वृंदावन से पार्टी बनाने की घोषणा
अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि पार्टी बनाने का विचार उन्हें श्री बांके बिहारी महाराज के दर्शन के दौरान आया। इसी वजह से उन्होंने वृंदावन की पावन धरती से पार्टी बनाने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि वे उच्च वर्ग और सनातन समाज की आवाज उठाने के लिए एक राजनीतिक मंच तैयार कर रहे हैं।
“अयोध्या के बाद काशी-मथुरा में भी हारेंगे” बयान से हलचल
अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा,
“धर्म स्थलों और मंदिरों का संरक्षण सरकार का नहीं, हमारा कर्तव्य है। वह अयोध्या हारे… अब काशी और मथुरा में भी हारेंगे।”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
किन मुद्दों को बनाएंगे चुनावी हथियार?
अग्निहोत्री ने कहा कि उनकी पार्टी मुख्य रूप से इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी—
- श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर
- UGC के नए नियम
- SC-ST एक्ट के कथित दुरुपयोग
- सनातन संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण
उनका आरोप है कि कॉरिडोर और सरकारी योजनाओं के नाम पर प्राचीन संस्कृति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
“सरकार समाज में विभाजन पैदा कर रही”
अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि वर्तमान फैसले समाज में विभाजन बढ़ा रहे हैं। खासतौर पर उन्होंने SC-ST एक्ट में फर्जी मुकदमों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पीड़ितों की मदद के लिए उन्होंने एक ईमेल आईडी भी जारी की है, जिस पर कई शिकायतें मिली हैं।
UGC नियमों पर भी तीखा हमला
अग्निहोत्री ने UGC के नए नियमों को “शिक्षा के नाम पर शोषण” बताया। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोग अपने बच्चों को ऐसी व्यवस्था में भेजना चाहेंगे, जहां उन्हें असुरक्षा महसूस हो।
गठबंधन के भी खुले विकल्प
उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि जरूरत पड़ी तो वे किसी राजनीतिक दल से गठबंधन भी कर सकते हैं। उनका कहना है कि लक्ष्य सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि समाज को एक “नया राजनीतिक विकल्प” देना है।