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अमेरिका ने ईरान की तरफ भेजा दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, ट्रंप बोले- “सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छा”

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिका ने अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भी पश्चिम एशिया की ओर रवाना कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक USS Gerald R Ford को ईरान की दिशा में भेजा गया है, जो दुनिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक परमाणु ऊर्जा से संचालित एयरक्राफ्ट कैरियरों में शामिल है।

इससे पहले USS Abraham Lincoln पिछले महीने ही अरब सागर में ईरान के करीब पहुंच चुका है। अब दोनों कैरियरों की मौजूदगी से यह साफ संकेत मिल रहा है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति को तेजी से बढ़ा रहा है।

ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी बात”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच बेहद अहम बयान दिया है। उत्तरी कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मिलने के बाद ट्रंप ने कहा कि ईरान में लीडरशिप बदलना जरूरी हो सकता है, और यह “सबसे अच्छी बात” होगी जो वहां हो सकती है।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि उनका प्रशासन ईरान को लेकर मिलिट्री एक्शन पर भी विचार कर रहा है। हालांकि उन्होंने तत्काल किसी हमले की घोषणा नहीं की, लेकिन यह साफ किया कि अगर बातचीत असफल रही तो अमेरिका पीछे नहीं हटेगा।

ईरान के सामने रखीं अमेरिका की कड़ी शर्तें

अमेरिका ने युद्ध से बचने के लिए ईरान के सामने कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करना होगा
  • बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रोकना होगा
  • परमाणु बम के लिए जमा किया गया यूरेनियम सरेंडर करना होगा

बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कम से कम दो दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन परमाणु हथियार और मिसाइलों के मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई।

नेतन्याहू-ट्रंप मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल

इसी बीच व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ट्रंप से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि इस बातचीत में ईरान पर संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई है।

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की यह बढ़ती सक्रियता ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

USS Gerald R Ford की तैनाती क्यों अहम?

USS Gerald R Ford को दुनिया का सबसे विशाल और शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर माना जाता है। इसके रवाना होने से यह संकेत मिल रहा है कि अमेरिका सिर्फ बयानबाजी नहीं कर रहा, बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य ताकत दिखाने के लिए भी तैयार है।

अब यह कैरियर अरब सागर में मौजूद USS Abraham Lincoln के साथ मिलकर ऑपरेशन करेगा, जहां पहले से ही अमेरिकी युद्धपोतों का एक बड़ा बेड़ा तैनात है।

आगे क्या?

फिलहाल अमेरिका ने सीधा हमला नहीं किया है, लेकिन तैनाती और ट्रंप के बयान से यह साफ है कि अगर कूटनीति विफल हुई तो तनाव और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान बातचीत और पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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