हेल्थ खजाना

दीमक की तरह आंख की रोशनी खा जाती है यह बीमारी, भारत में 1 करोड़ से ज्यादा लोग ग्लूकोमा से प्रभावित!

आंखों की खतरनाक बीमारियों में शामिल Glaucoma यानी काला मोतिया भारत में तेजी से बढ़ती चिंता का कारण बन रहा है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार देश में करीब 1 करोड़ 20 लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और इनमें से बड़ी संख्या अंधेपन के खतरे के करीब पहुंच सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि ग्लूकोमा को अक्सर “आंखों की रोशनी का चोर” कहा जाता है, क्योंकि यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती रहती है।

क्या होता है ग्लूकोमा?

ग्लूकोमा तब होता है जब आंख के अंदर दबाव बढ़ने लगता है और इससे आंख की महत्वपूर्ण नस यानी Optic Nerve को नुकसान पहुंचता है। यह नस आंख से दिमाग तक दृश्य संकेत पहुंचाने का काम करती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक जैसे-जैसे यह नस क्षतिग्रस्त होती जाती है, व्यक्ति की देखने की क्षमता कम होती जाती है और धीरे-धीरे दृष्टि सुरंग जैसी सीमित हो जाती है।

क्यों खतरनाक है यह बीमारी?

आंखों के विशेषज्ञ Dr. Ramanjit Sihota का कहना है कि ग्लूकोमा की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। कई मामलों में मरीज को तब पता चलता है जब आंख को काफी नुकसान हो चुका होता है।

डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी 40 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखने को मिलती है, हालांकि कुछ मामलों में यह कम उम्र या बचपन में भी हो सकती है।

क्या ग्लूकोमा का इलाज संभव है?

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लूकोमा से हुए नुकसान को पूरी तरह वापस नहीं लाया जा सकता। लेकिन सही समय पर इलाज शुरू करके बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

इलाज के लिए आमतौर पर

  • आंखों में डालने वाली दवाइयां
  • लेजर ट्रीटमेंट
  • जरूरत पड़ने पर सर्जरी

जैसे विकल्प अपनाए जाते हैं।

आंखों की विशेषज्ञ Dr. Sunita Dubey के अनुसार नियमित जांच और समय पर इलाज से आंखों की रोशनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

बचाव का सबसे अच्छा तरीका

विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लूकोमा से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है समय-समय पर आंखों की जांच कराना

खासतौर पर 40 साल के बाद लोगों को नियमित रूप से

  • आंखों के प्रेशर की जांच
  • विजन टेस्ट
  • ऑप्टिक नर्व की जांच

करानी चाहिए।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर बीमारी का जल्दी पता चल जाए तो उपचार के जरिए नजर को और नुकसान से बचाया जा सकता है

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