दुनियाराष्ट्रीय

‘यह हमारा युद्ध नहीं’: ईरान संघर्ष पर मोदी सरकार के रुख को मनीष तिवारी का समर्थन, शशि थरूर पहले ही कर चुके हैं बैकिंग!

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत की संतुलित विदेश नीति को अब विपक्ष के भीतर से भी समर्थन मिलने लगा है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “यह हमारा युद्ध नहीं है” और इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार का रुख सही है।

कांग्रेस के भीतर से समर्थन क्यों अहम?

तिवारी का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव चरम पर है। उन्होंने कहा कि भारत पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया के जटिल संघर्षों में एक “सीमित खिलाड़ी” रहा है, इसलिए किसी एक पक्ष का खुला समर्थन करना देश के हित में नहीं होगा।

इससे पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर भी भारत की नीति का समर्थन कर चुके हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनती दिख रही है।

रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर

मनीष तिवारी ने भारत की विदेश नीति के मूल सिद्धांत रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को रेखांकित किया।

👉 इसका अर्थ है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए किसी भी वैश्विक दबाव से स्वतंत्र निर्णय ले
👉 जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखे
👉 कूटनीति और संवाद को प्राथमिकता दे

विशेषज्ञों का मानना है कि यही नीति भारत को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में स्थापित करती है।

क्या है भारत का आधिकारिक रुख?

भारत ने शुरुआत से ही इस संघर्ष में:

  • किसी भी पक्ष का खुला समर्थन नहीं किया
  • संवाद और कूटनीति पर जोर दिया
  • सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की

हालांकि, नई दिल्ली ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताई है, साथ ही ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क भी बनाए रखा है।

ऊर्जा सुरक्षा भी बड़ी चिंता

भारत के लिए यह संघर्ष सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

👉 होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस गुजरता है
👉 किसी भी बाधा से भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है
👉 इसलिए भारत संतुलित रुख अपनाकर अपने हित सुरक्षित करना चाहता है

संघर्ष की पृष्ठभूमि और बढ़ता तनाव

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद यह संघर्ष तेज हुआ। इसके जवाब में ईरान ने भी सैन्य कार्रवाई की, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है।

अब यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक प्रभाव वाला संकट बन चुका है।

भारत की ‘व्यावहारिक कूटनीति’

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का मौजूदा रुख न तो पूरी तरह तटस्थ है और न ही किसी पक्ष के साथ खुलकर खड़ा है।

👉 यह एक संतुलित और व्यावहारिक रणनीति है
👉 इससे भारत अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा कर पा रहा है
👉 साथ ही वैश्विक मंच पर अपनी साख भी बनाए रख रहा है

SEO Keywords

Iran War India Stand, Strategic Autonomy India, Manish Tewari Statement, Shashi Tharoor Support, India Foreign Policy 2026, Middle East Conflict India

Related posts

“UP Weather Alert! पहले गर्मी फिर तूफानी बारिश, 6°C तक गिरेगा तापमान!”

News Author

आरक्षण सुधार आंदोलन पर मायावती की पहली प्रतिक्रिया, बोलीं- संवैधानिक आरक्षण के खिलाफ गतिविधियां देशहित में उचित नहीं!

News Author

Babri Masjid Construction Live Updates: बंगाल के मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण शुरू, हिंदू संगठनों का विरोध, चुनावी माहौल में नया विवाद

News Author

Leave a Comment