🇮🇳🤝🇷🇺 भारत-रूस संबंधों पर बड़ा बयान
भारत और रूस के रिश्ते एक बार फिर चर्चा में हैं। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने साफ कहा है कि चाहे वैश्विक हालात जैसे भी हों, रूस भारत को कच्चा तेल और LPG की सप्लाई जारी रखेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया में ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।
भारत को ऊर्जा सप्लाई पर रूस का भरोसा
अलीपोव ने कहा कि रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझता है और उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में भारत को रूस से मिलने वाली तेल आपूर्ति में काफी बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत के लिए रूस एक भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बना हुआ है।
रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है। S-400 मिसाइल सिस्टम की बची हुई डिलीवरी जल्द पूरी होने वाली है। इसके अलावा ब्रह्मोस मिसाइल और AK-203 राइफल को दोनों देशों की सफल साझेदारी का उदाहरण बताया गया है। राजदूत ने यह भी खुलासा किया कि भारत ने SU-57 लड़ाकू विमान में भी रुचि दिखाई है, हालांकि सुरक्षा कारणों से सभी रक्षा सौदों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
वैश्विक राजनीति और पश्चिमी दबाव
रूस ने अमेरिका और यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया कि वे प्रतिबंधों और दबाव के जरिए भारत-रूस संबंधों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और रूस ने खुद को भारत का “भरोसेमंद साथी” बताया है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
भारत और रूस ने मिलकर 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा है। फिलहाल भारत रूस से अधिक तेल खरीद रहा है, जिससे व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में है। इसे संतुलित करने के लिए रूस चाहता है कि भारत अपने कृषि उत्पाद, मशीनरी और अन्य वस्तुओं का निर्यात बढ़ाए।
राष्ट्रीय मुद्राओं में लेन-देन
दोनों देशों के बीच करीब 95% व्यापार अब अपनी-अपनी मुद्राओं में हो रहा है। इससे अमेरिका के प्रतिबंधों का असर कम करने में मदद मिल रही है। यह कदम भारत-रूस आर्थिक सहयोग को और मजबूत बना रहा है।
भविष्य की दिशा
व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे और नरेंद्र मोदी के रूस दौरे को लेकर भी चर्चा जारी है। इसके अलावा 2026 में होने वाले BRICS सम्मेलन में पुतिन की भागीदारी की संभावना भी जताई जा रही है।
निष्कर्ष
भारत और रूस के रिश्ते केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में यह साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।