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‘फौज को ऑपरेशन में पूरी छूट’: जनरल नरवणे ने ‘जो उचित समझो, वो करो’ का असली मतलब बताया!

भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी चर्चित किताब फोर स्टार डेस्टिनी और सेना से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की है। उन्होंने उस विवादित बयान “जो उचित समझो, वो करो” का भी स्पष्ट अर्थ समझाया, जिस पर हाल ही में सियासी बहस छिड़ गई थी।

‘जो उचित समझो, वो करो’ का क्या है असली मतलब?

जनरल नरवणे ने कहा कि इस लाइन का गलत अर्थ निकाला गया है। उनका साफ कहना है कि ऑपरेशन के दौरान सेना को पूरी छूट देना सरकार के भरोसे को दर्शाता है। इसका मतलब यह नहीं कि सेना बिना दिशा के काम करती है, बल्कि यह कि सैन्य नेतृत्व को हालात के अनुसार फैसला लेने की स्वतंत्रता दी जाती है।

‘फोर स्टार डेस्टिनी’ पर उठे विवाद पर सफाई

अपनी किताब को लेकर उठे विवाद पर नरवणे ने कहा कि उन्होंने खुद इसकी फाइनल कॉपी नहीं देखी है। उन्होंने बताया कि यह किताब किस रूप में बाहर आई, इस पर वह कुछ नहीं कह सकते। प्रकाशक की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि इसकी कोई आधिकारिक कॉपी फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

राजनीति से सेना को दूर रखने की बात

नरवणे ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना पूरी तरह गैर-राजनीतिक संस्था है। उन्होंने कहा कि सेना का काम केवल राजनीतिक नेतृत्व के आदेशों का पालन करना होता है। इसे राजनीति से जोड़ना या उसमें घसीटना गलत है।

🇮🇳 चीन को जवाब और भारत की रणनीति

सीमा विवाद पर बात करते हुए नरवणे ने कहा कि भारत ने एकजुट होकर चीन को जवाब दिया। उन्होंने दावा किया कि भारतीय प्रयासों के चलते चीन की सेना को पीछे हटना पड़ा, जो भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता थी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से बदली रणनीति

नरवणे ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए बताया कि अब भारत की सैन्य रणनीति में बदलाव आया है। अब केवल आतंकी ठिकानों को ही नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व ढांचे को भी निशाना बनाया जाता है, जिससे दुश्मन को कड़ा संदेश जाता है।

वैश्विक हालात से सीख और आत्मनिर्भरता पर जोर

उन्होंने कहा कि दुनिया में हो रहे संघर्ष, जैसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, से भारत को सीख लेनी चाहिए। नरवणे ने जोर देकर कहा कि देश को तेल, खनिज और रक्षा जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी है।

पाकिस्तान की रणनीति पर टिप्पणी

पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि वह हमेशा वैश्विक हालात का फायदा उठाने की कोशिश करता रहा है। हालांकि, उनके अनुसार, इस रणनीति के लंबे समय में नकारात्मक परिणाम ही सामने आए हैं।

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