पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई सरकार के गठन के साथ बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है। भाजपा सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने वाली अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने साफ संदेश दे दिया है कि “ममता बनर्जी न तो भगवान हैं और न ही कानून से ऊपर।”
चुनाव परिणाम के बाद बढ़ी सियासी तल्खी
हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की। भाजपा ने 207 सीटों पर कब्जा कर सरकार बनाई, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। इस परिणाम के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कई बड़े दावे किए थे, लेकिन जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना फैसला सुना दिया। उनके मुताबिक यह जनादेश साफ करता है कि राज्य की जनता बदलाव चाहती थी।
ममता बनर्जी को लेकर क्या बोलीं अग्निमित्रा पॉल
अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के कई नेता ममता बनर्जी को भगवान की तरह पेश करते रहे। उन्होंने कहा कि कुछ नेता उन्हें “मां सरदा” कहकर खुश करने की कोशिश करते थे, लेकिन जनता ने इस राजनीति को स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति संविधान और कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उनके बयान को बंगाल की नई राजनीतिक दिशा के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
शुभेंदु अधिकारी को बताया सबसे उपयुक्त चेहरा
जब उनसे पूछा गया कि भाजपा ने महिला मुख्यमंत्री क्यों नहीं चुना, तो अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट कहा कि शुभेंदु अधिकारी इस पद के लिए सबसे उपयुक्त नेता हैं। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी करीब तीन दशक से सक्रिय राजनीति में हैं और उन्होंने विधानसभा के भीतर और बाहर पार्टी को मजबूत नेतृत्व दिया है।
शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ अग्निमित्रा पॉल, दिलीप घोष, निसिथ प्रमाणिक, क्षुदिराम टुडू और अशोक कीर्तनिया ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
नई सरकार की तीन बड़ी प्राथमिकताएं
अग्निमित्रा पॉल ने नई सरकार की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। उनका आरोप है कि पिछली सरकार में पुलिस तंत्र का राजनीतिक इस्तेमाल हुआ।
दूसरी प्राथमिकता बुनियादी सुविधाओं के विकास की होगी। उन्होंने कहा कि अभी भी कई इलाकों में लोगों को सड़क, पानी, घर, ड्रेनेज और शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
तीसरी और सबसे अहम प्राथमिकता रोजगार होगी। उनके अनुसार बड़ी संख्या में बंगाल के युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर चुके हैं। नई सरकार का लक्ष्य राज्य में निवेश बढ़ाकर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है।
बंगाल की राजनीति में नया दौर
भाजपा की प्रचंड जीत के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। एक ओर नई सरकार अपनी प्राथमिकताओं को लेकर सक्रिय नजर आ रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष की भूमिका भी अहम हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बंगाल की जनता को बदलाव का कितना लाभ मिलता है।