Mamata Banerjee और Abhishek Banerjee के लिए पश्चिम बंगाल की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली Falta Assembly Constituency सीट पर अब पार्टी की पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कुछ ही दिनों में बदल गया पूरा माहौल
फाल्टा विधानसभा सीट पर दूसरे चरण के मतदान के दौरान टीएमसी का दबदबा साफ दिखाई दे रहा था। इलाके में पार्टी के झंडे और कार्यकर्ताओं की सक्रियता हर जगह नजर आ रही थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
अब क्षेत्र में दूसरे दलों के झंडे दिखाई दे रहे हैं और रिपोर्ट्स के मुताबिक टीएमसी की मौजूदगी काफी कमजोर पड़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
जहांगीर खान के हटते ही बिगड़ा समीकरण
फाल्टा सीट पर टीएमसी की मजबूत पकड़ के पीछे बाहुबली छवि वाले नेता Jahangir Khan को बड़ा कारण माना जाता था। लेकिन चुनावी मैदान से उनके हटने के बाद पार्टी का समीकरण बिगड़ गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, चुनाव से नाम वापस लेने के बाद जहांगीर खान इलाके से भी गायब बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मतदान के दिन भी वह नजर नहीं आए। यही वजह है कि टीएमसी की स्थिति अचानक कमजोर होती दिखाई दे रही है।
अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं खान
जहांगीर खान को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में टीएमसी को भारी समर्थन मिला था। लेकिन खान के चुनाव से हटने के बाद पार्टी ने इससे दूरी बना ली और इसे उनका निजी फैसला बताया।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित किया है।
पुनर्मतदान में हुई बंपर वोटिंग
फाल्टा सीट पर पुनर्मतदान के दौरान 86 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी।
दरअसल, पहले चरण के मतदान के दौरान ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी और छेड़छाड़ के आरोप लगे थे। विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था।
भाजपा और लेफ्ट के बीच कांटे की टक्कर
जहांगीर खान के मैदान छोड़ने के बाद अब मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और लेफ्ट उम्मीदवारों के बीच माना जा रहा है। भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। वहीं कांग्रेस भी चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।
ममता बनर्जी को लगातार झटके
इससे पहले भी Mamata Banerjee को कई चुनावी झटके लग चुके हैं। भवानीपुर सीट पर हार के बाद अब फाल्टा सीट पर कमजोर होती पकड़ ने बंगाल की राजनीति को और गर्मा दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह बदलाव राज्य की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।