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RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार, लोन और EMI पर क्या होगा असर?

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 जून को इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस फैसले से होम लोन, कार लोन और अन्य बैंकिंग ऋण लेने वाले ग्राहकों को राहत मिली है क्योंकि उनकी EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को ऋण उपलब्ध कराता है। वर्तमान में यह दर 5.25 प्रतिशत पर बनी हुई है। इससे पहले भी अप्रैल 2026 की बैठक में रेपो रेट को यथावत रखा गया था। RBI ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। वर्ष 2025 के दौरान केंद्रीय बैंक ने चार चरणों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर लोन को सस्ता बनाने की दिशा में कदम उठाए थे।

EMI पर क्या होगा असर?

रेपो रेट स्थिर रहने का सीधा मतलब है कि बैंकों की फंडिंग लागत में कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसे में अधिकांश बैंकों के लिए होम लोन, पर्सनल लोन और वाहन ऋण की ब्याज दरों में तत्काल बदलाव की संभावना कम है। इसका लाभ यह होगा कि मौजूदा लोनधारकों की EMI पहले की तरह जारी रहेगी और उन्हें अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा।

GDP ग्रोथ अनुमान घटाया

RBI ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितताएं विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं।

महंगाई और मानसून पर चिंता

RBI ने कहा कि फिलहाल खुदरा महंगाई नियंत्रण के दायरे में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा कीमतों में संभावित वृद्धि भविष्य में महंगाई बढ़ा सकती है। इसके अलावा कमजोर मानसून की आशंका भी चिंता का विषय बनी हुई है। कम वर्षा का असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार की कृषि विविधीकरण योजनाओं से इसके प्रभाव को कम करने की उम्मीद जताई गई है।

सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत

RBI के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही स्थिर रोजगार और उपभोग में वृद्धि शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है।

क्या है रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। जब यह दर कम होती है तो बैंकों को सस्ता धन मिलता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज पर लोन उपलब्ध करा सकते हैं। वहीं रेपो रेट बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं और EMI बढ़ सकती है। फिलहाल RBI के ताजा फैसले से करोड़ों लोनधारकों और बैंक ग्राहकों को राहत मिली है क्योंकि ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

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