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अंडमान में मिला प्राकृतिक गैस का दूसरा बड़ा भंडार, समुद्र के नीचे ऑयल इंडिया की नई खोज!

ऑयल इंडिया को अंडमान में मिली बड़ी सफलता

नई दिल्ली। देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अंडमान अपतटीय क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का दूसरा बड़ा भंडार खोजने में सफलता हासिल की है। इस नई खोज से अंडमान क्षेत्र के भविष्य में एक महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन उत्पादन केंद्र के रूप में उभरने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि यह खोज विजयपुरम-3 अन्वेषण कुएं में हुई है, जो अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है।

समुद्र की गहराई में मिला गैस का खजाना

जानकारी के अनुसार विजयपुरम-3 कुएं की ड्रिलिंग 355 मीटर गहरे समुद्री क्षेत्र में की गई। शुरुआती परीक्षण के दौरान लगातार फ्लेयरिंग से प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि हुई। कुएं में परफोरेशन के बाद दबाव तेजी से बढ़ा और गैस का उत्पादन शुरू हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

गैस की गुणवत्ता जानने के लिए हो रही जांच

ऑयल इंडिया ने बताया कि गैस के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं ताकि उसकी संरचना, कैलोरीफिक वैल्यू और उत्पत्ति की प्रक्रिया का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके। इसके लिए आइसोटोप स्टडी भी की जा रही है। कंपनी के अनुसार Eocene फॉर्मेशन में 1900 मीटर से अधिक गहराई पर गैस के संकेत मिले हैं, जो इस क्षेत्र में बड़े ऊर्जा भंडार की संभावना को दर्शाते हैं।

पिछले साल भी मिली थी बड़ी सफलता

गौरतलब है कि ऑयल इंडिया ने सितंबर 2025 में विजयपुरम-2 कुएं में भी प्राकृतिक गैस की खोज की थी। अब विजयपुरम-3 में मिली सफलता ने अंडमान क्षेत्र की ऊर्जा संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है। कंपनी के मुताबिक अब तक अंडमान में खोदे गए तीन अन्वेषण कुओं में से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है, जो भविष्य के ऊर्जा अन्वेषण कार्यक्रमों के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।

भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान क्षेत्र में लगातार हो रही गैस खोजें भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

ऑयल इंडिया की यह उपलब्धि न केवल ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि देश के आर्थिक विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

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