रामपुर। उत्तर प्रदेश सरकार ने रामपुर जिले में कार्यरत छह शासकीय अधिवक्ताओं की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। इस फैसले के बाद कानून और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। खास बात यह है कि हटाए गए अधिकांश अधिवक्ता समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ चल रहे विभिन्न मुकदमों में सरकार की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे थे।
शासन के निर्देश पर जारी हुआ आदेश
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के तहत आदेश जारी करते हुए छह शासकीय अधिवक्ताओं को कार्यमुक्त कर दिया। इनमें जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) अमित कुमार सक्सेना, नामित अधिवक्ता (दीवानी) संदीप सक्सेना तथा सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रमोद सागर, ओमप्रकाश लोधी, प्रताप सिंह मौर्य और अमित कुमार शामिल हैं।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के कारण इस निर्णय को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रामपुर लंबे समय से आजम खान और उनसे जुड़े मामलों के कारण प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा एक साथ छह अधिवक्ताओं को हटाने का निर्णय कई सवाल खड़े कर रहा है।
आजम खान मामलों से जुड़ाव बना चर्चा का विषय
हटाए गए अधिवक्ताओं में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मुकदमों में सरकार की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे थे। यही कारण है कि इस फैसले को सीधे तौर पर आजम खान से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि शासन या जिला प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई के पीछे कोई विशेष कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
नए अधिवक्ताओं की नियुक्ति का इंतजार
फिलहाल जिन अधिवक्ताओं को हटाया गया है, उनके स्थान पर नए शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति नहीं की गई है। इससे न्यायिक प्रक्रियाओं और लंबित मामलों पर प्रभाव पड़ने की संभावना को लेकर भी चर्चा हो रही है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि नए अधिवक्ताओं की तैनाती होने तक कई मामलों की पैरवी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी चर्चा
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हैं। ऐसे समय में रामपुर जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में हुए इस बदलाव ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में सरकार नए अधिवक्ताओं की नियुक्ति करती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।