परीक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों से उनकी बातचीत हुई है और छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं, जिन पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना आवश्यक है और सरकार को छात्रों की चिंताओं का गंभीरता से समाधान करना चाहिए।
पहली मांग: शिक्षा मंत्री को पद से हटाया जाए
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार के भीतर शिक्षा मंत्रालय में बदलाव को लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राहुल गांधी का कहना था कि केवल मंत्रालय बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अन्य दो प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने छात्रों की ओर से दो अन्य मांगों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार—
- प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित बल प्रयोग और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का भविष्य देश की सबसे महत्वपूर्ण पूंजी है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार की ओर से क्या कदम?
हाल के दिनों में केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को लेकर कई कदम उठाए हैं। NTA के अधिकारियों पर कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली की समीक्षा और संस्थागत सुधारों की दिशा में पहल की गई है। सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और व्यापक जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राजनीतिक बहस तेज
NEET और परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस जारी है। एक ओर सरकार सुधारों की बात कर रही है, वहीं विपक्ष शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव और जवाबदेही की मांग कर रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक मंचों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।