7 जिलों के 3.32 लाख लोग प्रभावित, 81 राहत शिविरों में चल रहा बचाव अभियान
गुवाहाटी। असम में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। लगातार बारिश और नदियों के उफान के कारण राज्य के कई हिस्से अब भी जलमग्न हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, अब तक 75 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 जिलों के 622 गांवों में 3,32,639 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रखे हुए है।
7 जिलों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर
बाढ़ से शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप (मेट्रो) सबसे अधिक प्रभावित हैं। इनमें चराइदेव सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां 1.42 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर और जोरहाट का स्थान है।
75 लोगों की जा चुकी है जान
मंगलवार को शिवसागर जिले में सात और लोगों की मौत के बाद इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है। राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी के लापता होने की सूचना नहीं है, लेकिन कई इलाकों में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।
81 राहत शिविरों में हजारों लोग सुरक्षित
प्रभावित लोगों के लिए राज्यभर में 81 राहत शिविर और 34 राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 32,477 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से भोजन, पीने का पानी, दवाइयां, तिरपाल, बच्चों के लिए खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान लगातार उपलब्ध कराया जा रहा है।
45 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि जलमग्न
बाढ़ का सबसे बड़ा असर खेती पर भी पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 45,341.98 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
धनसिरी नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर
गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ क्षेत्र में धनसिरी (दक्षिण) नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। SDRF, चिकित्सा टीमें और स्थानीय स्वयंसेवक राहत एवं बचाव कार्य में लगातार जुटे हुए हैं।