चेन्नई। तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ एक आतंकवादी जैसा व्यवहार किया गया और उन्हें हजारों पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के बीच चेन्नई से तंजावुर तक सड़क मार्ग से ले जाया गया। वहीं, अभिनेत्री तृषा को लेकर कथित ‘द्विअर्थी’ टिप्पणी के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया है।
‘मेरे बयान का गलत मतलब निकाला गया’
रिहाई के बाद एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि उनके भाषण को काट-छांट कर पेश किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनका पूरा बयान केवल तमिलनाडु के किसानों के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़े जाने की मांग से जुड़ा था और उसमें किसी प्रकार का दोहरा अर्थ नहीं था।
उन्होंने कहा कि कुछ अंशों को संदर्भ से अलग करके ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई।
‘महिलाओं का अपमान करने का सवाल ही नहीं’
उदयनिधि स्टालिन ने स्पष्ट किया कि उनका महिलाओं का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की हर मां और बहन उनके परिवार का हिस्सा हैं और वे महिलाओं का हमेशा सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनके पूरे भाषण को सुने बिना प्रतिक्रिया दी, उन्हें पहले वास्तविक संदर्भ को समझना चाहिए।
गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
डीएमके नेता ने आरोप लगाया कि उन्हें लगभग 400 किलोमीटर सड़क मार्ग से तंजावुर ले जाया गया और इस दौरान करीब तीन हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए। उनके अनुसार, यह कार्रवाई अत्यधिक और अनावश्यक थी।
उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, मानो वे कोई आतंकवादी हों। इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं कही जा सकती।
सरकार पर भी साधा निशाना
उदयनिधि स्टालिन ने राज्य सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झूठे मामलों से वे डरने वाले नहीं हैं और राजनीतिक लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखेंगे।
साथ ही उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता वास्तविक मुद्दों पर जवाब चाहती है, जबकि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
उदयनिधि स्टालिन को अभिनेत्री तृषा को लेकर कथित ‘द्विअर्थी’ टिप्पणी करने के आरोप में उनके चेन्नई स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें तंजावुर ले जाकर संबंधित मामले में कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। हालांकि उदयनिधि का कहना है कि उन्होंने केवल किसानों के हित में कावेरी का पानी छोड़े जाने की मांग की थी और उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया।
यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर कानूनी व राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।