अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर केवल मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज अगस्त 2026 में पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी कर्ज का चौथा बड़ा रिकॉर्ड बताया जा रहा है।
पांच महीने में 39 से 40 ट्रिलियन डॉलर हुआ कर्ज
अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज में पिछले कुछ समय के दौरान बेहद तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में अमेरिकी कर्ज 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा था, जबकि अगस्त में यह 40 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को भी पार कर गया। इससे महज करीब पांच महीने में कर्ज में लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई।
इससे पहले अगस्त 2025 में अमेरिका का कर्ज 37 ट्रिलियन डॉलर और अक्टूबर 2025 में 38 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा था। यानी करीब एक साल के भीतर अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज में कई ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी
जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के समय अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज लगभग 36.2 ट्रिलियन डॉलर बताया गया था। अगस्त 2026 तक यह आंकड़ा 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गया। इस तरह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से अब तक अमेरिकी कर्ज में लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ते रक्षा खर्च, सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर जैसे कार्यक्रमों पर सरकारी खर्च तथा कर्ज पर बढ़ते ब्याज भुगतान अमेरिकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
क्या ईरान के साथ तनाव बढ़ा रहा है आर्थिक बोझ?
ईरान के साथ लंबे समय से जारी तनाव, सैन्य तैयारियों और मध्य पूर्व में अमेरिकी गतिविधियों को भी बढ़ते खर्च से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि 40 ट्रिलियन डॉलर के पूरे कर्ज के लिए केवल ईरान संघर्ष जिम्मेदार है। अमेरिका की वित्तीय स्थिति पर घरेलू खर्च, राजस्व, ब्याज भुगतान और लंबे समय से चले आ रहे बजटीय घाटे जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से सरकारी खर्च में बर्बादी, धोखाधड़ी और दुरुपयोग कम करने तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
बढ़ता कर्ज आम अमेरिकियों को कैसे प्रभावित कर सकता है?
बढ़ते सरकारी कर्ज का असर आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक सरकारी उधारी से ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे मॉर्गेज, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा सरकार के बढ़ते ब्याज भुगतान से विकास और निवेश के लिए उपलब्ध संसाधनों पर भी असर पड़ सकता है।
अगर वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा आर्थिक झटका, मंदी या संघर्ष की स्थिति पैदा होती है, तो अमेरिका की वित्तीय चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। ऐसे में 40 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा केवल एक बड़ी संख्या नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद वित्तीय दबाव का संकेत भी माना जा रहा है।