राजनीती ब्रेकिंग न्यूज़राष्ट्रीय

Sugar Price Hike: चीनी के बढ़ते दाम पर केजरीवाल का सरकार पर हमला, बोले- ‘पूरी की पूरी अनपढ़ों की सरकार’!

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। पिछले कुछ दिनों में चीनी के थोक और खुदरा भाव में तेजी देखने को मिली है। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की।

केजरीवाल ने एथनॉल नीति पर उठाए सवाल

अरविंद केजरीवाल ने अपने पोस्ट में सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार को यह पता नहीं कि एक फैसले का दूसरे क्षेत्र पर क्या असर होगा। उन्होंने दावा किया कि तेल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गन्ने से एथनॉल बनाने पर जोर दिया गया, जिसके कारण चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और अब चीनी आयात करने की जरूरत पड़ सकती है।

केजरीवाल ने इसी संदर्भ में केंद्र सरकार को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए लिखा, “पूरी की पूरी अनपढ़ों की सरकार है।” उनके बयान के बाद चीनी की कीमतों और सरकार की नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

17 दिन में चीनी के दाम में बड़ा उछाल

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अगस्त की शुरुआत से चीनी के भाव में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार 31 जुलाई को थोक कीमत करीब 44 रुपये प्रति किलो थी। 1 अगस्त को यह बढ़कर 46 रुपये और 2 अगस्त को 49 रुपये प्रति किलो हो गई।

इसके बाद 6 अगस्त को थोक भाव करीब 54 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। 20 अगस्त तक थोक बाजार में चीनी का भाव 60 रुपये प्रति किलो और खुदरा बाजार में करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात कही गई है।

मिल कीमत भी रिकॉर्ड स्तर पर

चीनी की औसत मिल कीमत भी तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में औसत मिल कीमत 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। एक साल पहले यही कीमत करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई थी।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत बढ़कर करीब 52.3 रुपये प्रति किलो हो गई, जबकि एक साल पहले यह लगभग 46.34 रुपये प्रति किलो थी।

नए चीनी सीजन में सप्लाई को लेकर चिंता

आने वाले 2026-27 चीनी सीजन को लेकर भी शुरुआती स्टॉक पर नजर बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती स्टॉक घरेलू जरूरत से कम रह सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी इस आंकड़े को अंतिम रूप नहीं दिया है और अलग-अलग अनुमानों में काफी अंतर है।

उद्योग के एक वर्ग के मुताबिक पुराना स्टॉक करीब 40 से 42 लाख टन हो सकता है, जबकि कुछ शोधकर्ताओं का अनुमान इससे कम यानी 32 से 35 लाख टन का है। अगर शुरुआती स्टॉक कम रहा तो नए सीजन की शुरुआत में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

महंगाई और राजनीति दोनों के केंद्र में चीनी

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है। चाय, मिठाई, बेकरी और कई खाद्य उत्पादों की लागत भी इससे प्रभावित हो सकती है। ऐसे में विपक्ष ने महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

हालांकि, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे केवल एथनॉल नीति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उत्पादन, स्टॉक, मौसम, मिल कीमत, मांग और सरकारी नीतियों सहित कई कारक बाजार भाव को प्रभावित करते हैं। आने वाले दिनों में सरकार और चीनी उद्योग के फैसलों पर यह निर्भर करेगा कि कीमतों में तेजी जारी रहती है या उपभोक्ताओं को राहत मिलती है।

Related posts

बंगाल चुनाव: बंपर वोटिंग के बाद अमित शाह का बड़ा दावा!

News Author

मई में थोक महंगाई 9.68% पर पहुंची, आम आदमी की जेब पर बढ़ेगा बोझ!

News Author

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर पहली बार बोले धर्मेंद्र प्रधान, कहा- ‘ये अराजक तत्वों की बी-टीम’!

News Author

Leave a Comment