Nepal Flood Update: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। आपदा के बाद मृतकों की संख्या 600 के पार पहुंच गई है, जबकि करीब 2,000 लोगों के अब भी लापता होने की खबर है। नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इस बीच चीन ने तिब्बत के सीमावर्ती इलाके में एक बार फिर संभावित भूस्खलन और मलबे से बनी झील में पानी बढ़ने को लेकर चेतावनी जारी की है।
नेपाल में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े
नेपाल पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक देश में बाढ़ और आपदा से मरने वालों की संख्या 616 बताई गई है। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 626 तक बताया गया। इससे पहले 579 मौतों की जानकारी सामने आई थी।
चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार तिब्बत में भी इस आपदा से जुड़े घटनाक्रम में 7 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। यदि नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों में कोई दोहराव नहीं है, तो दोनों क्षेत्रों में मृतकों की कुल संख्या कम से कम 623 हो सकती है।
करीब 2 हजार लोग अब भी लापता
नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 लोग अभी भी लापता हैं। ऐसे में राहत एवं बचाव अभियान के दौरान मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बचाव दल मलबे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क बहाल करने की कोशिश भी जारी है, ताकि राहत सामग्री और बचाव दल आसानी से पहुंच सकें।
चीन ने फिर जारी किया लैंडस्लाइड अलर्ट
नेपाल में तबाही के बीच चीन ने तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्र को लेकर नया अलर्ट जारी किया है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, भूस्खलन के मलबे से बनी एक झील में पानी का स्तर फिर से बढ़ रहा है। इससे दोबारा मलबा खिसकने या लैंडस्लाइड का खतरा पैदा हो सकता है।
नेपाल और तिब्बत के बीच प्रमुख जमीनी सीमा क्षेत्र ग्यारोंग पोर्ट के आसपास बचाव और निगरानी अभियान को बढ़ाया गया है।
ड्रोन से हो रही निगरानी
संभावित खतरे को देखते हुए बचाव टीमों ने ढलानों की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात किए हैं। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में निगरानी चौकियां भी बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य भूस्खलन या मलबे के खिसकने के संकेत मिलने पर आसपास मौजूद बचाव कर्मियों को समय रहते चेतावनी देना है।
राहत और बचाव अभियान तेज
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां और विभिन्न सरकारें राहत कार्यों में मदद के लिए आगे आई हैं। प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश, चिकित्सा सहायता, भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने का काम तेज किया जा रहा है।
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच राहत एजेंसियों के सामने चुनौती यह भी है कि नए भूस्खलन या बाढ़ की स्थिति पैदा न हो। प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
नेपाल की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को सामने ला दिया है। आने वाले समय में लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बहाल करना राहत एजेंसियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।