नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते जलस्तर को लेकर भारत के तटीय शहरों के लिए चिंता बढ़ रही है। एक संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्ट में समुद्र के बढ़ते जलस्तर और ग्लेशियरों के पिघलने से दक्षिण एशिया के तटीय एवं डेल्टा क्षेत्रों पर बढ़ते जोखिम की ओर ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट में मुंबई और कोलकाता जैसे भारतीय महानगरों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों शहर निकट भविष्य में पूरी तरह समुद्र में डूबने वाले हैं। विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से तटीय बाढ़, समुद्री जल के बढ़ते प्रभाव, विस्थापन और शहरी बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले दबाव को लेकर है।
समुद्र का बढ़ता जलस्तर क्यों चिंता का विषय?
ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। इसके दो बड़े प्रभाव समुद्र के जलस्तर से जुड़े हैं—ग्लेशियर और बर्फ की चादरों का पिघलना तथा महासागरों के पानी का गर्म होकर फैलना।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से 2023 के बीच वैश्विक औसत समुद्री जलस्तर में हर साल करीब 4.7 मिलीमीटर की वृद्धि हुई। 2024 में यह वृद्धि करीब 5.9 मिलीमीटर बताई गई, जो रिकॉर्ड स्तर था।
मुंबई और कोलकाता पर क्या है खतरा?
मुंबई और कोलकाता दोनों ही घनी आबादी वाले बड़े शहर हैं और इनके कई हिस्से समुद्र तथा निचले तटीय क्षेत्रों के करीब स्थित हैं। समुद्र का जलस्तर बढ़ने के साथ अत्यधिक बारिश, तूफानी लहरों और तटीय बाढ़ जैसी घटनाओं का प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है।
इसका असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहेगा। सड़कें, परिवहन व्यवस्था, ऊर्जा नेटवर्क, जल आपूर्ति, इमारतें और भूजल संसाधन भी प्रभावित हो सकते हैं।
1.4 करोड़ लोगों का क्यों किया गया जिक्र?
रिपोर्ट के आधार पर सामने आई खबर में मुंबई और कोलकाता की संयुक्त आबादी के करीब 1.4 करोड़ लोगों को संभावित जोखिम से जोड़कर देखा गया है। यह आंकड़ा किसी एक दिन या अचानक आने वाली बाढ़ में इतने लोगों के डूबने की भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि लंबे समय में बढ़ते समुद्री जलस्तर और तटीय जोखिम के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है असर
समुद्र का पानी तटीय इलाकों में आगे बढ़ने पर साफ पानी और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। जलभराव और दूषित पानी के कारण पानी से होने वाली बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा घरों और रोजगार के स्थानों से विस्थापन लोगों के सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है।
सरकारों के सामने बड़ी चुनौती
बढ़ते समुद्री जलस्तर के खतरे से निपटने के लिए तटीय शहरों में बेहतर ड्रेनेज, मजबूत तटीय सुरक्षा, बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली और जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन की जरूरत होगी।
मुंबई और कोलकाता के लिए यह चेतावनी किसी तत्काल डूबने की भविष्यवाणी से ज्यादा भविष्य के जलवायु जोखिम को समझने और समय रहते तैयारी करने का संकेत है। आने वाले दशकों में समुद्र का बढ़ता जलस्तर दुनिया के तटीय शहरों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।