उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। कुठौंद थाना क्षेत्र के डगरू पुरवा गांव में मोबाइल फोन को लेकर बड़ी बहन से हुए विवाद के बाद आठ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना के समय घर में माता-पिता मौजूद नहीं थे। बच्चे को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
मोबाइल फोन को लेकर भाई-बहन में हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डगरू पुरवा गांव निवासी सोनू सिंह खेती के साथ मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके परिवार में पत्नी संगीता, नौ वर्षीय बेटी जानवी और आठ वर्षीय बेटा रितिक था। बताया गया कि घटना के समय दोनों बच्चे घर के एक कमरे में मौजूद थे।
इसी दौरान रितिक ने अपने पिता का मोबाइल फोन लेकर वीडियो देखना शुरू कर दिया। उसकी बड़ी बहन जानवी ने मोबाइल उससे ले लिया। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। मोबाइल वापस नहीं मिलने से रितिक परेशान हो गया।
कमरे में अकेले था बच्चा, बहन ने देखा तो मच गई चीख-पुकार
बताया जा रहा है कि विवाद के कुछ देर बाद रितिक कमरे में चला गया। इसी दौरान उसने खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। कुछ समय बाद जब उसकी बहन कमरे में पहुंची तो भाई को गंभीर हालत में देखकर उसकी चीख निकल गई।
बच्ची की आवाज सुनकर माता-पिता भी मौके पर पहुंचे। परिजनों ने आनन-फानन में बच्चे को वहां से निकालकर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
घटना की सूचना मिलने पर कुठौंद थाना प्रभारी विजय कुमार पांडेय पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
प्रारंभिक जानकारी में मोबाइल फोन को लेकर भाई-बहन के बीच विवाद की बात सामने आई है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आठ वर्षीय बच्चे की मौत से गांव में भी शोक का माहौल है।
बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति पर ध्यान देना जरूरी
यह घटना अभिभावकों के लिए भी एक गंभीर संदेश है। बचपन में छोटी-छोटी बातों पर बच्चों के बीच विवाद होना सामान्य है, लेकिन उनकी भावनाओं और व्यवहार में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना, उनकी परेशानियों को धैर्य से सुनना और उन्हें भावनात्मक सहयोग देना बेहद जरूरी है। मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर भी घर में स्पष्ट नियम होने चाहिए, ताकि बच्चों के बीच अनावश्यक तनाव की स्थिति न बने।