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मुरादाबाद ग्रामीण में 20 साल से BJP को जीत का इंतजार, क्या 2027 में टूटेगा सपा का किला?

UP Election 2027: मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट पर सपा का दबदबा, लगातार चार चुनावों में जीत के बाद BJP के सामने बड़ी चुनौती

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। मुरादाबाद जिले की ग्रामीण विधानसभा सीट पर एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मुकाबला दिलचस्प रहने की संभावना है। वर्ष 2007 से 2022 तक हुए लगातार चार विधानसभा चुनावों में सपा ने इस सीट पर जीत दर्ज की है। दूसरी ओर, BJP वर्ष 1993 के बाद से यहां जीत हासिल नहीं कर पाई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 में BJP सपा के इस मजबूत गढ़ में सेंध लगा पाएगी?

मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर सपा का दबदबा

मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 1991 से 2022 के बीच हुए आठ विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने पांच बार जीत दर्ज की। वहीं, जनता दल, BJP और कांग्रेस को एक-एक बार सफलता मिली।

वर्ष 2007 में सपा के उस्मानुल हक ने BJP के रामवीर सिंह को 3,160 वोटों से हराया था। इसके बाद 2012 में सपा के शमीमुल हक ने BJP के सुरेश चंद्र सैनी को 22,736 वोटों से शिकस्त दी। वर्ष 2017 में BJP की प्रदेशव्यापी लहर के बावजूद सपा के हाजी इकराम कुरैशी ने 28,781 वोटों से जीत हासिल की।

2022 में सपा की सबसे बड़ी जीत

विधानसभा चुनाव 2022 में सपा के मोहम्मद नासिर ने मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 1,43,337 वोट मिले, जबकि BJP के कृष्णकांत मिश्रा को 86,517 वोट प्राप्त हुए। इस तरह मोहम्मद नासिर ने 56,820 वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीता।

इस परिणाम ने क्षेत्र में सपा की मजबूत स्थिति को फिर सामने रखा। 2012 से 2022 के बीच सपा की जीत का अंतर लगातार बढ़ा, जो BJP के लिए चुनौती का संकेत माना जा सकता है।

BJP के सामने क्या हैं चुनौतियां?

BJP के लिए सबसे बड़ी चुनौती पिछले चुनावों में लगातार बढ़ता हार का अंतर है। वर्ष 2007 में मुकाबला काफी करीबी था, लेकिन 2022 तक जीत का अंतर 56 हजार से अधिक हो गया।

हालांकि, चुनावी नतीजे केवल पिछले रिकॉर्ड से तय नहीं होते। उम्मीदवार का चयन, स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य, संगठन की सक्रियता और चुनावी गठबंधन जैसे कारक भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। BJP यदि क्षेत्र में अपने जनाधार को मजबूत करती है और स्थानीय मुद्दों पर प्रभावी रणनीति बनाती है, तो मुकाबले की तस्वीर बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सामाजिक समीकरण भी होंगे अहम

मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर मुस्लिम, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जाती है। ऐसे में सभी प्रमुख दलों के लिए अलग-अलग सामाजिक समूहों का समर्थन हासिल करना अहम होगा।

साथ ही, स्थानीय विकास, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण सुविधाओं जैसे मुद्दे भी मतदाताओं की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव के समय उम्मीदवारों की छवि और जनता से उनका जुड़ाव भी अहम रहेगा।

2027 में किसकी होगी जीत?

मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर सपा के सामने अपना मजबूत चुनावी आधार बचाए रखने की चुनौती होगी, जबकि BJP का लक्ष्य लंबे समय से चला आ रहा जीत का इंतजार खत्म करना होगा।

पिछले चुनावों के आंकड़े सपा की मजबूत स्थिति दिखाते हैं, लेकिन 2027 का परिणाम अभी भविष्य के गर्भ में है। उम्मीदवारों, गठबंधनों और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों के स्पष्ट होने के बाद ही मुकाबले की दिशा का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल मुरादाबाद ग्रामीण सीट उत्तर प्रदेश की उन विधानसभा सीटों में शामिल है, जहां 2027 में सपा और BJP के बीच कड़ी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।

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