UCC को लेकर मुरादाबाद में फिर सियासी बयानबाजी
मुरादाबाद के पूर्व सांसद और समाजवादी पार्टी नेता डॉ. एसटी हसन ने समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह कुरान और शरियत में बताए गए प्रावधानों के अनुसार जीवन जीने की बात पर कायम हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब देश में UCC को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है।
एसटी हसन ने UCC पर क्या कहा?
मुरादाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान एसटी हसन ने कहा कि यदि UCC में ऐसी व्यवस्था आती है जो कुरान में बताए गए प्रावधानों के विपरीत है, तो वह उसका विरोध करेंगे। उन्होंने धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग समुदायों की अपनी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं।
उन्होंने UCC के मुद्दे को लेकर यह भी कहा कि देश में ऐसे विषय नहीं लाए जाने चाहिए, जिनसे हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका हो। उनके मुताबिक महंगाई, बेरोजगारी, किसान और मध्यम वर्ग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
2029 तक UCC लागू करने की बात पर प्रतिक्रिया
यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस हालिया बयान की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें NDA शासित राज्यों में 2029 तक UCC लागू किए जाने की बात कही गई थी। UCC का उद्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की अलग-अलग राय सामने आती रही है।
UCC पर जारी है देशव्यापी बहस
UCC में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों जैसे विषयों को लेकर बहस होती रही है। समर्थक इसे समान नागरिक अधिकारों से जोड़ते हैं, जबकि विरोध करने वाले पक्ष धार्मिक स्वतंत्रता और मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े सवाल उठाते हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक मामलों के प्रबंधन से जुड़े अधिकारों को लेकर भी इस बहस में चर्चा होती है।
मुरादाबाद से आए एसटी हसन के बयान ने एक बार फिर UCC को लेकर राजनीतिक बहस को स्थानीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।