
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को एक टिप्पणी में कहा कि अगर डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन युद्ध में युद्धविराम कराने में सफल होते हैं, तो कीव उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करेगा। ज़ेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय आया है जब पूरी दुनिया नोबेल समिति की आज होने वाली आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार कर रही है।
रूस ने भी ट्रंप के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है। क्रेमलिन के वरिष्ठ अधिकारी यूरी उशाकोव ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि मास्को यूक्रेन में युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप के प्रयासों की सराहना करता है और उन्हें यह पुरस्कार मिलना चाहिए। यह बयान उस समय आया जब नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा विजेता की घोषणा कुछ ही घंटों में होने वाली थी।
पिछले कुछ महीनों में डोनाल्ड ट्रंप ने खुद भी इस पुरस्कार के लिए ज़ोरदार अभियान चलाया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई बार कहा है कि वे इस सम्मान के असली हकदार हैं और नॉर्वे के अधिकारियों से सीधे बातचीत भी की है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान गाज़ा, अफगानिस्तान, उत्तर कोरिया और मध्य पूर्व में कई शांति प्रयास किए थे, जिनकी वजह से दुनिया भर में तनाव कम हुआ।
ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स (X)” पर अपने फॉलोअर्स से अपील की कि अगर वे मानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप इस पुरस्कार के योग्य हैं, तो पोस्ट को रीट्वीट करें। इसी बीच, व्हाइट हाउस के आधिकारिक अकाउंट ने भी ट्रंप की एक तस्वीर साझा करते हुए उन्हें “Peace President” कहा — जिसके बाद ऑनलाइन बहस और भी तेज़ हो गई।
ट्रंप ने शुक्रवार सुबह अपने एक बयान में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर निशाना साधते हुए कहा कि “ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार कुछ भी किए बिना मिल गया, जबकि मैंने दुनिया भर में आठ युद्ध समाप्त कराए। अगर किसी को यह पुरस्कार मिलना चाहिए, तो वो मैं हूँ।”
नॉर्वे की नोबेल समिति पर इस बार पहले से कहीं ज़्यादा दबाव है। ट्रंप समर्थक इसे उनकी कूटनीतिक जीत बता रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह राजनीति और शांति के मूल्यों का मिलाजुला खेल है।
अब पूरी दुनिया की नज़रें आज होने वाली घोषणा पर टिकी हैं — क्या ट्रंप वास्तव में “Peace President” साबित होंगे?