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भारत–कनाडा रिश्तों को नई रफ्तार: सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और व्यापार पर फोकस, मार्क कार्नी की भारत यात्रा से जगी उम्मीद

नई दिल्ली | 28 फरवरी 2026

भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होता दिख रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney अपने पहले आधिकारिक द्विपक्षीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। मार्च 2025 में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में ‘रिसेट मोमेंट’ के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi और कार्नी इससे पहले भी जी-7 और जी-20 शिखर सम्मेलनों में मुलाकात कर चुके हैं। अब यह दौरा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

सुरक्षा सहयोग में नई मजबूती

हाल के महीनों में दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा स्तर पर सहयोग बढ़ाने के संकेत दिए हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval और कनाडा की एनएसए Nathalie G. Drouin के बीच ओटावा में हुई बैठक में ड्रग्स तस्करी (विशेषकर फेंटेनिल प्रीकर्सर), साइबर सुरक्षा, संगठित अपराध और ट्रांसनेशनल क्राइम पर मिलकर काम करने पर सहमति बनी।

दोनों देशों ने कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर सूचना साझाकरण, लियाजन ऑफिसर की तैनाती और साइबर पॉलिसी सहयोग को औपचारिक रूप देने का फैसला किया है। यह कदम आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने में भी अहम माना जा रहा है।

परमाणु ऊर्जा में 2.8 बिलियन डॉलर की संभावित डील

भारत और कनाडा के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग पुराना और मजबूत रहा है। 2010 के सिविल न्यूक्लियर समझौते के बाद 2015 में कनाडा की कंपनी Cameco और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच यूरेनियम सप्लाई करार हुआ था।

अब दोनों देश नए 10 साल के समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। सूत्रों के मुताबिक करीब 2.8 बिलियन डॉलर की यूरेनियम सप्लाई डील संभव है। भारत 2047 तक अपनी न्यूक्लियर पावर क्षमता 100 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। कनाडा, जो दुनिया के बड़े यूरेनियम उत्पादकों में से एक है, इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यह डील भारत की एनर्जी सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन और कार्बन उत्सर्जन घटाने की रणनीति को मजबूती दे सकती है।

व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 60 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) वार्ता को दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी है।

AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, ऑयल-गैस, शिक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर फोकस में हैं। कनाडा में बड़ी भारतीय डायस्पोरा भी दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने में अहम कड़ी है।

क्यों अहम है यह दौरा?

पिछले कुछ वर्षों में भारत–कनाडा रिश्तों में तनाव देखने को मिला था। लेकिन अब यह यात्रा संकेत दे रही है कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों—कानून का शासन, प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकार—के आधार पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, मार्क कार्नी की यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के नए दौर की शुरुआत है। सुरक्षा से लेकर क्लीन एनर्जी और वैश्विक सप्लाई चेन तक, भारत और कनाडा मिलकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं।

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