लखनऊ/हैदराबाद। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “एनआरसी का छिपा हुआ रूप” बताते हुए कहा कि यह भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम हटाने की एक बड़ी साजिश है।
अखिलेश यादव ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा,
“यह एसआईआर नहीं है, बल्कि एसआईआर के वेश में एनआरसी है। वे सीधे एनआरसी लागू नहीं कर सके, इसलिए अब इसी तरीके से उसे लागू किया जा रहा है।”
3 करोड़ से अधिक मतों पर खतरे का दावा
सपा प्रमुख ने आशंका जताई कि उत्तर प्रदेश में तीन करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम कटने का खतरा है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को बड़े पैमाने पर नाम हटाने की अनुमति देने के बजाय मतदाता भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एनआरसी लागू होती है तो जिन दस्तावेजों की मांग की जाएगी, वही दस्तावेज अब एसआईआर के नाम पर मांगे जा रहे हैं।
“अगर एनआरसी कभी लागू होती है तो कौन से कागजात देने होंगे? वही कागजात अब पेश करने को कहा जा रहा है,” अखिलेश ने कहा।
हैदराबाद में AI शिखर सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे अखिलेश
अखिलेश यादव शनिवार को आयोजित होने वाले ‘विजन इंडिया – एआई शिखर सम्मेलन’ में भाग लेने के लिए हैदराबाद पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और बीआरएस नेताओं से भी मुलाकात की, जिनमें पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव शामिल हैं।
राजनीतिक साजिश का आरोप
सपा अध्यक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की आड़ में विपक्ष समर्थक और कमजोर वर्गों के मतदाताओं को सूची से बाहर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आगामी चुनावों में भाजपा को फायदा पहुंचाया जा सके।
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