नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद Raghav Chadha को संसद में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राघव चड्ढा को राज्यसभा की पिटीशन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति को बीजेपी नेतृत्व का बड़ा भरोसा माना जा रहा है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, राज्यसभा चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने 20 मई से समिति का पुनर्गठन किया है।
क्या है पिटीशन कमेटी?
पिटीशन कमेटी संसद की सबसे पुरानी समितियों में से एक मानी जाती है। इसका मुख्य काम जनता से जुड़ी याचिकाओं और शिकायतों पर विचार करना होता है। यह समिति नागरिकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को संसद तक पहुंचाने का माध्यम भी मानी जाती है।
राज्यसभा सचिवालय के अनुसार, इस समिति की शुरुआत 15 सितंबर 1921 को तत्कालीन काउंसिल ऑफ स्टेट में हुई थी। शुरुआत में इसका दायरा सीमित था, लेकिन 1964 में नियमों में बदलाव के बाद आम जनता के हित से जुड़े मामलों को भी इसमें शामिल कर लिया गया।
10 सदस्यों वाली कमेटी की कमान
राघव चड्ढा को जिस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, उसमें कुल 10 सदस्य शामिल हैं। कमेटी में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंक कुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाषिश खुंटिया, रवांग्रा नरजारी और पी. संदोष कुमार को सदस्य बनाया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जिम्मेदारी राघव चड्ढा की संसदीय भूमिका को और मजबूत करेगी। साथ ही बीजेपी में उनकी स्थिति भी मजबूत मानी जा रही है।
बीजेपी में शामिल होने के बाद बढ़ा कद
राघव चड्ढा हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उनके साथ कई अन्य राज्यसभा सांसदों ने भी पार्टी बदली थी। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बीजेपी की राज्यसभा में संख्या और मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी नेतृत्व ने राघव चड्ढा को यह अहम जिम्मेदारी देकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी उन्हें भविष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में देख रही है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं और माना जा रहा है कि आने वाले समय में राघव चड्ढा संसद में और सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
राजनीतिक संदेश भी अहम
बीजेपी में शामिल होने के तुरंत बाद इतना बड़ा पद मिलना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी नए नेताओं को तेजी से अवसर देने में विश्वास रखती है।
साथ ही विपक्षी दलों के लिए भी यह नियुक्ति एक बड़ा राजनीतिक संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में राज्यसभा की कार्यवाही में राघव चड्ढा की भूमिका पर सभी की नजरें रहेंगी।