राष्ट्रीय

गेमिंग एप के जरिए ठगी: कम निवेश पर जीत, ज्यादा पैसा लगाते ही हार — ऐसे बिछाते थे साइबर ठगों का जाल

पटना में गेमिंग ऐप फ्रॉड का खुलासा

पटना। बिहार की राजधानी पटना में गेमिंग एप के जरिए साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में चार साइबर ठगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपियों के पास से दो लैपटॉप और चार पेमेंट स्कैनर मशीनें बरामद की गई हैं, जिनके जरिए ठगी की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की जाती थी।

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह चेन सिस्टम के तहत काम करता था और इसका मास्टरमाइंड कोई और है, जिसकी पहचान करने में पुलिस जुटी हुई है। कई अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

कम निवेश पर जीत, ज्यादा पैसा लगाते ही हार

ठगों की रणनीति बेहद शातिर थी।

  • शुरुआत में यूजर को कम रकम लगाकर गेम जिताया जाता था,
  • जिससे उसका भरोसा बन जाए।
  • जैसे ही यूजर ज्यादा पैसा दांव पर लगाता, गेम में उसे लगातार हार मिलने लगती।

असल में, यूजर जिस गेम को खुद खेल रहा समझता था, उसका पूरा कंट्रोल साइबर अपराधियों के पास होता था। गेम का असली खिलाड़ी कोई और होता था।

यूपीआई और क्यूआर कोड से होती थी रकम की वसूली

ठग पीड़ितों से पैसे मंगाने के लिए कई तरीके अपनाते थे—

  • यूपीआई पेमेंट
  • सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर
  • वाट्सएप पर भेजे गए क्यूआर कोड

इन पैसों को अलग-अलग खातों में मंगाकर तुरंत निकासी कर ली जाती थी, ताकि ट्रेल न मिले।

प्ले स्टोर नहीं, APK फाइल से कराते थे ऐप इंस्टॉल

जांच में खुलासा हुआ है कि यह गेमिंग एप Google Play Store पर उपलब्ध नहीं थे।

  • यूजर्स को वाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा जाता था
  • वहीं से APK फाइल भेजकर मोबाइल में एप इंस्टॉल कराया जाता था

गिरोह के सदस्य एप बनाने, उसकी सेटिंग, बैंक खाते जुटाने, पैसे निकालने और ठगों को ठहराने तक की पूरी व्यवस्था करते थे।

सोशल मीडिया विज्ञापनों से फंसाते थे यूजर्स

ठग इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन चलाते थे।
इन विज्ञापनों को इस तरह डिजाइन किया जाता था कि ऑनलाइन गेम खेलने वालों को यह सबसे पहले दिखाई दें

लिंक पर क्लिक करते ही यूजर एक ग्रुप में जुड़ जाता, जहां उसे गेम के नियम समझाए जाते और निवेश के लिए उकसाया जाता।

फर्जी विजेताओं से जीत का दिखावा

भरोसा जीतने के लिए गिरोह एक और चाल चलता था—

  • ग्रुप में फर्जी विजेताओं की तस्वीरें साझा की जाती थीं
  • उनके मोबाइल नंबर भी दिए जाते थे

हकीकत में ये सभी लोग गिरोह के ही सदस्य होते थे। अगर कोई यूजर संपर्क करता, तो ठग खुद को विजेता बताकर बात करते और निवेश के लिए प्रेरित करते।

मोबाइल और बैंकिंग तक ले लेते थे कंट्रोल

कुछ मामलों में ठगों ने यूजर्स को भेजे गए लिंक के जरिए

  • उनके मोबाइल फोन
  • और बैंकिंग सिस्टम का कंट्रोल भी हासिल कर लिया

इसके बाद पीड़ित के खाते से रकम सीधे गिरोह के खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।

पुलिस की अपील: ऐसे गेमिंग एप से रहें सावधान

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि—

  • अनजान लिंक पर क्लिक न करें
  • प्ले स्टोर के बाहर से कोई गेमिंग एप इंस्टॉल न करें
  • जल्दी पैसा कमाने के लालच में न आएं

ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

Keywords (SEO):
गेमिंग एप ठगी, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, पटना साइबर क्राइम, APK गेमिंग ऐप स्कैम, UPI फ्रॉड, साइबर ठग गिरोह, ऑनलाइन ठगी बिहार

Related posts

पीएम मोदी का आरा में बड़ा आरोप: ‘RJD ने कांग्रेस से कनपट्टी पर कट्टा रख CM पद छीना’

News Author

दिल्ली सरकार ने छठ के लिए 27 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा कर दी है

News Author

‘चिकन नेक’ पर बयानबाज़ी करने वालों को हिमंत सरमा की दो-टूक, बांग्लादेश में हैं दो नाज़ुक कॉरिडोर

News Author

Leave a Comment