अन्तर्राष्ट्रीय

‘छोड़ो पनडुब्बियां, डुबा दो युद्धपोत’, अटलांटिक में रूस-अमेरिका आमने-सामने, पुतिन के करीबी ने ट्रंप को हड़काया

US-Russia Conflict News

वेनेजुएला में कार्रवाई के बाद अमेरिका और रूस के रिश्तों में एक बार फिर जबरदस्त तनाव देखने को मिल रहा है। इस बार टकराव का केंद्र बना है अटलांटिक महासागर, जहां अमेरिकी बलों ने एक रूसी तेल टैंकर ‘मैरिनारा’ को जब्त कर लिया। इस कार्रवाई के बाद रूस में गुस्सा फूट पड़ा है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी सांसद ने अमेरिका को खुलेआम धमकी दे डाली है।

रूसी टैंकर जब्त, भड़का मॉस्को

अमेरिकी बलों द्वारा जब्त किया गया रूसी टैंकर पहले ‘बेला-1’ के नाम से जाना जाता था। मॉस्को का कहना है कि यह टैंकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था और पूरी तरह से कानूनी रूप से रूसी झंडे के तहत रजिस्टर्ड था।
रूस ने इस कार्रवाई को

  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन
  • खुले समुद्र में जबरन बल प्रयोग
    करार दिया है।

‘अमेरिका समुद्री डकैत बन गया’

रूसी सांसद अलेक्सी जुरावेलेव ने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन अब खुद को सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों से ऊपर समझने लगा है।
उन्होंने कहा,

“अगर अमेरिका इसी तरह खुले समुद्र में जहाज जब्त करता रहा, तो जवाब सैन्य स्तर पर दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो पनडुब्बियों की जगह अमेरिकी युद्धपोतों को डुबो दिया जाएगा।”

हालांकि, रूस सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस बयान का समर्थन नहीं किया है, लेकिन यह बयान रूस की राजनीतिक जमात में बढ़ते आक्रोश को साफ दिखाता है।

पुतिन के करीबी ने ट्रंप को दी खुली चेतावनी

अलेक्सी जुरावेलेव को राष्ट्रपति पुतिन का करीबी माना जाता है। उनके बयान को सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक,

  • वेनेजुएला में हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई
  • रूस से जुड़े तेल नेटवर्क पर दबाव
    ने ट्रंप को आक्रामक रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

अमेरिका का क्या है पक्ष?

अमेरिका का कहना है कि टैंकर प्रतिबंधित रूसी तेल नेटवर्क का हिस्सा था और उस पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था।
अमेरिकी कोस्ट गार्ड के मुताबिक,

  • टैंकर को पहले से ट्रैक किया जा रहा था
  • जब्ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के तहत की गई

वहीं रूस का दावा है कि

  • टैंकर को 24 दिसंबर 2025 को वैध परमिट मिला था
  • जहाज पूरी तरह कानून का पालन कर रहा था

अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने के संकेत

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस मुद्दे पर दोनों देशों ने सख्त रुख बनाए रखा, तो

  • अटलांटिक क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ सकता है
  • अमेरिका-रूस संबंधों में और गिरावट आ सकती है
  • वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है

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