वॉशिंगटन/तेहरान।
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान का वीडियो भी साझा किया है। वहीं, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने की बात कही है।
90 सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार 8 जुलाई को चलाए गए इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनके जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खतरा पहुंच सकता था।
अमेरिकी सेना के मुताबिक जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी उपकरण, मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्र, नौसेना से जुड़े सैन्य अड्डे तथा सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। अमेरिका का दावा है कि इस कार्रवाई से ईरान की नौसैनिक क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप ने साझा किया सैन्य अभियान का वीडियो
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सैन्य कार्रवाई का वीडियो साझा करते हुए कहा कि स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमेरिकी हमलों में ईरान के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में स्थित एक एयरबेस को निशाना बनाया गया, जिसका इस्तेमाल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स करती थी।
वीडियो सामने आने के बाद यह सैन्य अभियान वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
ईरान ने भी किया जवाबी हमला
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई के जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
ईरान का दावा है कि पहले चरण में कुवैत के कैंप आरिफजान, अली अल सलेम एयरबेस तथा बहरीन के जुफफैर और शेख ईसा एयरबेस को निशाना बनाया गया। हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
ईरान ने लगाए गंभीर आरोप
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी हमलों में दक्षिणी प्रांतों के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। साथ ही पूर्वी क्षेत्रों में स्थित कुछ महत्वपूर्ण पुलों पर भी हमले किए गए, जिससे क्षेत्र में यातायात और सैन्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
ईरान का कहना है कि अमेरिका ने अपने पूर्व वादों का उल्लंघन करते हुए एक बार फिर सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक सुरक्षा, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
नोट: इस खबर में शामिल दावे अमेरिका, CENTCOM और ईरानी मीडिया द्वारा जारी बयानों पर आधारित हैं। दोनों पक्षों के सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।