Ghaziabad Three Sisters Death Case | Online Game Addiction | UP News 2026
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भारत सिटी सोसायटी में रहने वाली तीन सगी नाबालिग बहनों की एक साथ मौत की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। परिवार के अनुसार, तीनों बहनों को एक ऑनलाइन गेम खेलने की आदत थी और इसी से जुड़ा एक नोट भी पुलिस को मिला है।
पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच जारी है।
सुसाइड नोट में क्या लिखा था?
पुलिस के मुताबिक, मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इसमें लिखा था—
“मम्मी-पापा सॉरी… जिस गेम को आप छुड़वाना चाहते थे, अब आपको पता चलेगा हम इस गेम से कितना प्यार करते थे।”
नोट में “कोरियन लवर गेम” का भी उल्लेख बताया जा रहा है।
कौन थीं तीनों बहनें?
पुलिस के अनुसार, मृतक बहनों की पहचान:
- पाखी (12)
- प्राची (14)
- विशिका (16)
के रूप में हुई है।
कोविड के समय लगी थी ऑनलाइन गेम की आदत
परिजनों के अनुसार, कोविड-19 के दौरान तीनों बहनों को ऑनलाइन गेम खेलने की आदत लग गई थी। बताया जा रहा है कि वे एक टास्क-बेस्ड ऑनलाइन गेम खेलती थीं।
पुलिस ने यह भी कहा है कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तीनों बहनें पिछले करीब 2 साल से स्कूल नहीं जा रही थीं, हालांकि इस बिंदु की भी जांच की जा रही है।
परिवार और सोसायटी में मातम
बताया जा रहा है कि तीनों बहनों में आपसी लगाव बहुत ज्यादा था। वे रोजमर्रा के काम—खाना, पढ़ाई, सोना—सब कुछ साथ करती थीं। घटना के बाद परिवार सदमे में है और सोसायटी में भी शोक का माहौल है।
पुलिस जांच में जुटी, मोबाइल और ऐप्स की होगी जांच
पुलिस अधिकारी के अनुसार, यह मामला बेहद संवेदनशील है। जांच में:
- मोबाइल फोन और गेमिंग ऐप्स की जांच
- परिवार व आसपास के लोगों से पूछताछ
- नोट की फॉरेंसिक जांच
- मानसिक स्थिति और व्यवहार का आकलन
जैसे पहलुओं पर काम किया जा रहा है।
ऑनलाइन गेमिंग को लेकर क्या सीख मिलती है?
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों और किशोरों के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार स्क्रीन टाइम, टास्क-बेस्ड गेमिंग और भावनात्मक निर्भरता बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है।
अगर घर में बच्चा गेमिंग की लत में हो तो क्या करें?
- गुस्सा करके फोन छीनने के बजाय बातचीत करें
- स्क्रीन टाइम के नियम बनाएं
- सोने और पढ़ाई का रूटीन तय करें
- जरूरत हो तो काउंसलर/मनोवैज्ञानिक की मदद लें
- बच्चे को अकेला न छोड़ें, भावनात्मक सपोर्ट दें