प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महिला आरक्षण को लेकर अपनी पार्टी पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
“महिला आरक्षण का विरोध कभी नहीं किया”
ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की समर्थक रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी में संसद और विधानसभा दोनों में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा—“महिला आरक्षण का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता और न कभी उठा है।”
परिसीमन को लेकर असली विवाद
सीएम ममता ने कहा कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन प्रक्रिया है। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार इस प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संघीय ढांचे और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
“3 साल तक इंतजार क्यों किया?”
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर थी, तो 2023 में बिल पास होने के बाद 3 साल तक इंतजार क्यों किया गया? उन्होंने यह भी पूछा कि चुनाव के समय ही इसे क्यों उठाया गया और परिसीमन के साथ क्यों जोड़ा गया।
“देश को गुमराह करने की कोशिश”
ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के संबोधन को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि सरकार ने ईमानदारी से समाधान निकालने के बजाय देश को गुमराह करने का रास्ता चुना। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी है और ऐसे मुद्दों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।
🇮🇳 सियासत तेज, आरोप-प्रत्यारोप जारी
महिला आरक्षण को लेकर अब सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
एक तरफ सरकार इसे महिलाओं के अधिकार से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति बता रहा है।