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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच अब यूपी के संभल और बदायूं तक पहुंची

सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में यूपी कनेक्शन की जांच तेज

पश्चिम बंगाल की राजनीति को झकझोर देने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी और पूर्व वायुसेना कर्मी चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टीम अब संभल और बदायूं में सुराग तलाश रही है।

जांच एजेंसियों को एक संदिग्ध मोबाइल नंबर से अहम जानकारी मिली है, जिसके आधार पर हत्या के तार उत्तर प्रदेश से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

7 किलोमीटर पीछा कर किया गया हमला

प्रारंभिक जांच के मुताबिक, हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ की गाड़ी का करीब 7 किलोमीटर तक पीछा किया। वारदात उस समय हुई जब वह कोलकाता से मध्यमग्राम स्थित अपने घर लौट रहे थे।

रास्ते में डोलतला इलाके के पास एक कार ने उनकी स्कॉर्पियो को रोका। इसके तुरंत बाद बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने 6 से 10 राउंड गोलियां चलाईं।

फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा

फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि इस हमले में ग्लॉक 47X पिस्टल का इस्तेमाल किया गया। यह अत्याधुनिक हथियार आम तौर पर संगठित और पेशेवर अपराधियों से जोड़ा जाता है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि जिस तरीके से वारदात को अंजाम दिया गया, उससे यह साफ है कि हमला पूरी योजना और तैयारी के साथ किया गया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार चंद्रनाथ रथ को चार गोलियां लगी थीं। इनमें से दो गोलियां सीने को चीरते हुए आर-पार निकल गईं, जबकि एक गोली पेट में लगी।

इस हमले में उनके ड्राइवर बुद्धदेब बेरा भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनका इलाज जारी है।

पुलिस को क्या मिला?

घटनास्थल से पुलिस ने फर्जी नंबर प्लेट लगी कार और बिना नंबर की बाइक बरामद की है। जांच के दौरान अब तक तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस अब मोबाइल कॉल डिटेल्स, सीसीटीवी फुटेज और यूपी कनेक्शन के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।

कौन थे चंद्रनाथ रथ?

41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ मूल रूप से पूर्वी मेदिनीपुर के रहने वाले थे। उन्होंने भारतीय वायुसेना में करीब 20 साल तक सेवा दी थी।

रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। साल 2020 में जब सुवेंदु अधिकारी भाजपा में शामिल हुए, तब चंद्रनाथ रथ भी उनके साथ आ गए। उन्हें सुवेंदु अधिकारी का बेहद भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था और वे संगठनात्मक व प्रशासनिक समन्वय का अहम काम संभालते थे।

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