मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर हाई कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। इंदौर खंडपीठ ने अपने फैसले में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने खुशी जताई, जबकि मुस्लिम पक्ष ने फैसले का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। यह मामला अब देश की शीर्ष अदालत तक पहुंचने की तैयारी में है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ी कानूनी लड़ाई देखने को मिल सकती है।
ओवैसी का तीखा विरोध
Asaduddin Owaisi ने हाई कोर्ट के फैसले का खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि भोजशाला पिछले 700 वर्षों से मस्जिद रही है और यह वक्फ संपत्ति है।
ओवैसी ने 1935 के गजट, वक्फ रजिस्ट्रेशन और Places of Worship Act का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि अदालत ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नजरअंदाज किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को पलट देगा।
उमा भारती ने फैसले का किया स्वागत
बीजेपी की वरिष्ठ नेता Uma Bharti ने फैसले पर खुशी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाई कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखने के बाद भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। उमा भारती ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि लंबे समय से चल रहे विवाद में यह न्याय की जीत है।
दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता Digvijaya Singh ने कहा कि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है और पूजा-अर्चना तथा इबादत से जुड़े मुद्दे पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना चाहिए। उन्होंने एएसआई रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले में पारदर्शिता जरूरी है और अभी यह विवाद समाप्त नहीं हुआ है।
मुस्लिम पक्ष की कानूनी तैयारी
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi ने भी फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कमाल मौला मस्जिद थी, है और रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। हालांकि उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की भी अपील की।
संत समाज और हिंदू संगठनों में खुशी
हिंदू संगठनों और संत समाज ने हाई कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया है। संतों का कहना है कि यह वर्षों के संघर्ष के बाद मिला न्याय है। भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि अब परिसर में बिना किसी बाधा के पूजा हो रही है और आने वाले समय में मूर्ति स्थापना की उम्मीद भी जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजरें
भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ रहा है। एक तरफ हिंदू पक्ष इसे न्याय की जीत बता रहा है, तो दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष फैसले को चुनौती देने की तैयारी में जुट गया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला आने वाले दिनों में देश की सबसे बड़ी कानूनी और धार्मिक बहसों में शामिल हो सकता है।