केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने सिल्वर इंपोर्ट को ‘फ्री कैटेगरी’ से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी’ में डाल दिया है। यानी अब विदेश से चांदी मंगाने के लिए सरकारी मंजूरी या लाइसेंस लेना जरूरी होगा। सरकार का यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
सरकार के मुताबिक हाल के महीनों में चांदी के आयात में बेहद तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल 2026 में सिल्वर इंपोर्ट सालाना आधार पर करीब 157 फीसदी बढ़ गया। यही वजह है कि सरकार ने आयात को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाया है।
इससे पहले सरकार सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर चुकी है। अब नई व्यवस्था के तहत बिना मंजूरी के चांदी का आयात नहीं किया जा सकेगा।
विदेशी मुद्रा बचाने पर फोकस
सरकार ऊर्जा और उर्वरक जैसी जरूरी वस्तुओं के लिए विदेशी मुद्रा बचाना चाहती है। भारत के पास फिलहाल 690 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो लगभग 10 महीनों के आयात को कवर कर सकता है।
हालांकि वैश्विक तनाव और लंबा खिंचते युद्धों के कारण सरकार सतर्कता बरत रही है। सोना और चांदी जैसे गैर-जरूरी आयात विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं।
चांदी का आयात रिकॉर्ड स्तर पर
वित्तीय वर्ष 2026 में भारत का सोने का आयात 24.08 फीसदी बढ़कर 71.98 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं चांदी का आयात 149.48 फीसदी बढ़कर 12.05 अरब डॉलर हो गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में चांदी का आयात 411.06 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह केवल 159.85 मिलियन डॉलर था।
मार्च 2026 में भारत ने 2,47,008 किलोग्राम चांदी आयात की, जो मार्च 2025 की तुलना में करीब 91 फीसदी ज्यादा है।
बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से चांदी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। आने वाले समय में घरेलू बाजार में सिल्वर की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
ज्वेलरी इंडस्ट्री और सिल्वर ट्रेडर्स पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह फैसला आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी था।